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३४. डाक्टर संडरलैंडकी पुस्तक
यदि ' मोडर्न रिव्यू' के सम्पादकके घरकी तलाशी ली जा सकती है,[१] तो उन्हें गिरफ्तार भी क्यों नहीं किया जा सकता, बंगाल सरकारने हमें इस शंकामें अधिक समयतक नहीं रखा। रामानन्द चटर्जीको गिरफ्तार कर लिया गया है और अब उनपर राजद्रोहका मुकदमा चलाया जायेगा। स्पष्ट ही उन्होंने जो राजद्रोह किया है वह है उनका रेवरेंड संडरलैंड की पुस्तक प्रकाशित करना। इस पुस्तकके सम्बन्धमें कवि रवीन्द्रनाथ ठाकुरने कहा है :—
- रेवरेंड डॉ॰ संडरलॅंडसे मेरा व्यक्तिगत घनिष्ठ परिचय हुआ। उनकी भारत यात्रा और मेरो अमेरिका यात्राओंके दौरान मुलाकातों में आरम्भसे ही मेरे हृदय में उनके प्रति सम्मान की भावना रही है। उन्होंने अपनी पुस्तकमें भारतीय जनताको समस्याको उठाकर अपूर्व साहस, गाम्भीर्य और सदाशयताका परिचय दिया है; इसकी में भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूँ। भौगोलिक सीमाओंसे निर्बाध और जातीयताके बन्धनों से मुक्त, उनके मानव-प्रेमसे हम सभी ऐसे लोगों को शिक्षा लेनी चाहिए जो उनके आदर्शोंसे प्रेरणा लेना और उनके कामको आगे बढ़ाना चाहते हैं।
- पुस्तकको भूमिकामें लेखकने कहा है :[२]
- मेरी बड़ी इच्छा है कि पुस्तक लिखने के मेरे उद्देश्यको गलत न समझा जाये। कोई यह न कह पाये और न क्षण-भर के लिए इसपर विश्वास ही कर पाये कि यह पुस्तक लिखने में मेरी भावना ग्रेट ब्रिटेनसे शत्रुताकी रही है। ऐसी कोई बात नहीं है। इसका अर्थ उन दलीलोंसे जरा भी आगे नहीं जाता, जो अमेरिकी गुलामीके पुराने जमानेमें गुलामोंकी मुक्तिके लिए दी जानेवाली दलीलों का होता था। वे दलीलें भी गुलामी प्रथाको कायम रखनेवाले अमेरिकी राष्ट्रके प्रति किसी शत्रुताको भावनासे पेश नहीं की जाती थीं। . . . मैं किसी भी अर्थ में इंग्लैंड का शत्रु अथवा अहित चाहनेवाला नहीं हूँ। मेरा विश्वास है कि, भारतके पक्ष में जो बातें कह रहा हूँ, वे इंग्लैंड और भारत दोनोंके भलेके लिए हैं। मैं नहीं चाहता कि भारतमें अथवा दूसरी किसी जगह इंग्लैंडके प्रति किसी भी प्रकारको दुर्भावना उत्पन्न हो। लेकिन मैं यह भी चाहता हूँ कि इंग्लैंड भारतके प्रति और भारतके माध्यम से संसारके प्रति कोई अन्याय न करें। . . .
- सभी जानते हैं कि अमेरिकाकी ही भाँति इंग्लैंड भी दो हैं। एक इंग्लैंड वह है जो अपने देशमें ही नहीं, समस्त संसारमें न्याय एवं स्वतन्त्रता देखना