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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/७६

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

अपमानजनक रुख अपनाया गया था। प्रतिवेदनकारोंने उसका औचित्य पूरी तरह से स्वीकार किया है।

अधिकारियोंसे आशा की गई थी कि वे

"बारडोली ताल्लुका व वालोड महाल और चौरासी ताल्लुकेकी जनता द्वारा की गई शिकायतों की जाँच करें और अपनी रिपोर्ट दें —

(क) कि हाल ही में की गई लगान-बुद्धि भू-राजस्व संहिताकी शर्तों या नियमों को देखते हुए अनावश्यक हैं;

(ख) कि जनताको उपलब्ध रिपोटोंमें दिये गये आँकड़े उतने पर्याप्त नहीं हैं। जिनके आधारपर लगान-वृद्धि उचित ठहराई जा सके और कुछ आँकड़े तो गलत भी हैं;

और उनको यह भी

पता लगाना था कि अगर जनताकी शिकायत न्यायपूर्ण है तो लगानको पुरानी दरोंमें कितनी कमी या वृद्धि आदि करनी हो या की जानी चाहिए।

आयुक्तोंने इन सभी प्रश्नोंपर जनताका पक्ष सबल पाया। पहली शिकायत के सम्बन्धमें आयुक्तोंका मत था कि अधिकारियोंने खण्ड १०७ के विरुद्ध कार्य किया है। दूसरी शिकायतकी जाँच ब्यौरेवार, सर्वांगीण, कुशल और शिक्षाप्रद है। प्रतिवेदनका यही सर्वश्रेष्ठ भाग है; जो कुल प्रतिवेदन ७७ पृष्ठोंका है और यह भाग ४० पृष्ठोंका। इस जाँचसे यह पूरी तौरपर सिद्ध हो जाता है कि जनता द्वारा सर्वश्री जयकर और ऐंडर्सनके विरुद्ध लगाये सभी आरोप सही हैं। इसका इससे बढ़कर और क्या समर्थन हो सकता :—

कहना ही पड़ेगा कि हमें विचारार्थ सौंपे गये विषयके भाग (ख) में उल्लिखित शिकायत सार रूप में सही है। कुल लगान और भू-विक्रयके आंकड़ोंको अलग रखकर देखें, तो रिपोर्टोंमें जो जानकारी या आँकड़े उपलब्ध हैं, स्पष्ट हो उनके आधारपर न तो लगानकी अधिकतम दरोंमें मंजूर की गई आम किस्तकी वृद्धिका और न ही कुछ खास-खास गाँवोंके लगानमें की गई बहुत अधिक वृद्धिका पर्याप्त रूपसे कोई औचित्य सिद्ध होता है। लगान और भू-विक्रय सम्बन्धी आँकड़े इकट्ठे करनेमें लापरवाही बरती गई है और यह साफ दिखाई देता है कि अधिकांश मामलोंमें ये आँकड़े बिल्कुल गलत हैं; और आम तौरपर कहा जा सकता है कि ये विश्वसनीय नहीं हैं। इतना ही नहीं, हमारी रायमें तो आँकड़ों को इस्तेमाल करनेकी परम्परागत विधि भी सिद्धान्ततः निर्दोष नहीं है और अन्य जिलोंमें इसके उपयोगका व्यवहारमें जो भी परिणाम निकले, पर गुजरात के इस भागमें तो इससे सन्तोषजनक परिणाम हाथ लग ही नहीं सकते; क्योंकि इस इलाके में पट्टों और भू-विक्रयके सौदोंपर तरह-तरह की बहुत सारी चीजों के परस्पर विरोधी प्रभाव पड़ते रहते हैं । इस निष्कर्षको ध्यान में रखते हुए, हमारा निवेदन है कि वर्तमान बन्दोबस्तको दोनोंमें से किसी भी ताल्लुकेमें बरकरार नहीं रखा जा सकता।