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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/९१

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टिप्पणियाँ

मानता हूँ और इस लेख द्वारा पाठकोंको भी इस प्रयोगसे मिलनेवाले आत्मानन्दमें अपना हिस्सेदार बनाता हूँ।

[गुजरातीसे]
नवजीवन, १६-६-१९२९
 

४९. टिप्पणियाँ

मुझे चेतावनी

जब मेरे 'यह कैसी जीवदया' शीर्षक लेखोंने[] कोलाहल मचा रखा था, मेरे पास पत्रोंकी वर्षा-सी हो रही थी। तब जो पत्र आये थे उनमें से सरल भावसे लिखे एक पत्रको मैंने सँभाल कर रख छोड़ा था। पत्र ता॰ १५-१०-१९२६ का है। पत्रकी बातें मुझे सचेत रख सकती हैं, इसलिए मैंने उसे अपनी फाइलमें रख छोड़ा था। जब मैं हर सप्ताह 'नवजीवन' का दफ्तर खोलता हूँ तो उसमें से अखाकी पंक्तियाँ बरबस मेरा ध्यान खींच लेती हैं। वे पंक्तियाँ ये हैं :[]

झोणी माया ते छानी छरी, मीठी थइने मारे खरी;
वलगी पछी अलगी नहि थाय, ज्ञानी पण्डितने मांहीथी खाय
अनेक रूपे माया रमे, ज्यां त्यां तेवुं गमे;
वही जो कोई न ज्ञान उपजे, तो ज्ञानी थईने भेली भजे।
जे कर्म होय मूकवा जोग, अखा तेनी ज पडावे भोग;
एवा मायाना घणा छे घाट, ज्यां जोइए त्यां मायाना हाट.

पत्रकी इबारत लम्बी है। उसमें मेरे लेखके विरोध में दलीलें दी गई हैं मगर उनकी ध्वनि तो यही है कि सूक्ष्म मायाके वश होकर कहीं मैंने धर्म समझकर अधर्म तो नहीं किया है? मुझे यह ख्याल न तो उस समय हुआ था, न आज ही होता है। लेकिन फिर भी उससे क्या मतलब? यह तो सच है कि माया मीठी छुरी बनकर वार करती है। अगर मुझे यह मालूम पड़ जाये कि मैं मायासे घिरा हुआ हूँ तो फिर वह माया ही कहाँ रही? अन्धा अगर देख सके तो फिर वह अन्धा ही क्यों कहा जाये? अनेक प्रवृत्तियों में फँस कर उनमें निवृत्तिके दर्शनकी चेष्टामें, मैं कब मायाका

 
  1. आठ क्रमिक लेख; देखिए खण्ड ३१ और ३२।
  2. गुजरातके प्रसिद्ध भक्त कवि अखाकी इन पंक्तियोंका अर्थ इस प्रकार है : "सूक्ष्म माथा छिपी छुरी के समान है, जो मोठी बनकर वार करती है। एक बार लिपटनेपर फिर अलग नहीं होती, और जो ज्ञानी या पण्डित हैं उन्हें भीतर-ही-भीतर कुतरती रहती है। माया अनेक रूपमें क्रीड़ा करती है और जहाँ जैसा देखती है, वहां वैसी बन जाती है। अगर किसीको ज्ञान प्राप्त हो जाता है, तो माथा भी उसके साथ ज्ञानी बनकर उसके भजन-पूजनको संगिनी बन जाती है। जो काम छोड़ने योग्य होते हैं, माया मनुष्यको उन्होंमें फँसा देती है। अखा कहता है कि इस मायाके अनेक रूप है; जहां जाते हैं, वहीं मायाका हाट आबाद मिलता है।"