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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 41.pdf/९७

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५६. पत्र: छगनलाल जोशीको

१७ जून, १९२९

चि॰ छगनलाल,

तुम्हारा पत्र मिला। सलाह न माँगनेका निश्चय मुझे अच्छा लगा है। वहाँ जो हैं, उनसे पूछ लेना ही काफी है। निर्णय भी जल्दी कर लेना। भूल होनेका डर मनमें न रखना। हो तो होने दो।

तुम लिखते हो आज मेरी तबीयत अच्छी है। इससे लगता है कि तुम्हारा इससे पहलेका कोई पत्र मुझे अभी नहीं मिला। यह १३ तारीखका पत्र है।

वल्लभभाईकी शिकायत के बारेमें तुम्हें पत्र लिखा है।[] वह मिल गया होगा।

सब लोग मजे में हैं। मेरा प्रयोग चल रहा है। किशोरलालका पत्र बहनोंके लिए है। तुम और शिक्षक पढ़ लेना।

बापूके आशीर्वाद

गुजराती (जी॰ एन॰ ५४२२) की फोटो नकलसे।

५७. पत्र: महादेव देसाईको

१७ जून, १९२९

चि॰ महादेव,

तुम्हारा पत्र अभी मिला है अभी अर्थात् ८-२५ बजे। मौन छोड़ने में पाँच मिनिट हैं; इसलिए यह लिख रहा हूँ। तुम दोनोंने वहाँ जाकर ठीक ही किया है। दोनोंको थोड़े आरामकी जरूरत तो थी ही। मुझे तो अभी आराम नहीं मिला, मिलने का सवाल भी नहीं था। बाईसके बाद एक सप्ताह (आराम लेने) का विचार है और उस अरसेमें गीताको समाप्त करनेकी बात है। यह हो सके तो अच्छा है। यहाँ भी पैसा मिलेगा। तुम साथ नहीं हो यह अखरता तो है। यहाँके अनुभव भी कोई साधारण नहीं हैं; पर सभी कुछ थोड़े ही मिल सकता है? वहाँ वल्लभभाईका साथ है, वह भी इतना ही अच्छा है।

कल प्रेम विद्यालय में पहुँचे। जवाहरलालकी पत्नीकी बीमारीका तार आ गया इसलिए आज वह चला भी गया है। कृपलानी साथमें है। देवदास नैनीतालमें मिल गया था। ब्रजकृष्ण भी साथ है। अच्छा खासा साथ तो है ही।

  1. ११ जूनका; देखिए पृष्ठ ३३।