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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/४१३

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३९२. उद्धरण : दादाभाई नौरोजी के नाम पत्रसे[]

जून ३०, १९०६२[]

मैं 'इंडियन ओपिनियन' की एक प्रति निशान लगाकर अलग लिफाफे में भेज रहा हूँ । उसमें नगर-निगम संग्राहक विधेयक (म्युनिसिपल कॉरपोरेशन्स कन्सॉलिडेशन बिल) के सम्बन्धमें नेटाल उपनिवेश के गवर्नरके नाम लॉर्ड एलगिनके पत्रोंकी नकल उपलब्ध है। लॉर्ड एलगिनके खरीतेपर विचार करनेके लिए हालमें नगरपालिका संघकी जो बैठक हुई उसमें किये गये निर्णयकी ओर मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। निर्णयका आशय यह है कि " रंगदार " की परिभाषा में कोई परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए। इस निर्णयसे भारतीय समाजके दलित और अपमानित होते रहनेका खतरा जैसा-का- तैसा बना रहता है । आशा है कि भारत-मन्त्री और भारत सरकार उपनिवेश-मन्त्री द्वारा दिये गये सुझावको कार्यान्वित करानेका आग्रह करेंगे। साथ ही यह भी इंगित करना चाहता हूँ कि लॉर्ड एलगिनने विधेयककी उस धाराका कोई उल्लेख नहीं किया है, जिसके द्वारा उन सबके मतदानका अधिकार छीन लिया गया है जिन्हें संसदीय मताधिकार प्राप्त नहीं है । आपको निस्सन्देह याद होगा कि स्वर्गीय श्री हैरी एस्कम्बकी तीव्र इच्छापर नेटालके भारतीय समाजने उन सब भारतीयोंका मताधिकारसे वंचित रखा जाना स्वीकार कर लिया था, जिनके नाम उस समय संसदीय मतदाताओंकी सूची में शामिल नहीं थे। इसमें यह खयाल स्पष्ट था कि मताधिकारसे वंचित रखनेकी सीमा बढ़ाई नहीं जायेगी। आपको एक बार फिर याद दिला देना ही पर्याप्त होगा कि यदि नेटाल-निवासी ब्रिटिश भारतीयोंको नगरपालिका मताधिकारसे इस तरह वंचित रखा जाता है तो उनकी स्थिति, जैसी भारतमें होती, उससे खराब होगी। भारत में बेशक ऐसी प्रातिनिधिक संस्थाओंका लाभ उन्हें प्राप्त है। कुछ नगरपालिकाओं द्वारा ब्रिटिश भारतीयों और युरोपीयों में ईर्ष्याजनक और मनमाने भेदभाव का विवरण 'इंडियन ओपिनियन' के स्तंभों में अनेक बार प्रकाशित हो चुका है। उसे देखते हुए यह प्रकट है कि यदि नेटालके भारतीय समाज के नागरिक अधिकारों पर यह कुठाराघात रोकने के उपाय तत्काल नहीं किये गये तो उक्त समाज जबरदस्त अन्यायका शिकार हो जायेगा ।

दादाभाई नौरोजी के अंग्रेजी पत्रको फोटो नकल (जी० एन० २३१६) से ।Smallrefs

  1. १ और
  2. २. मूल प्राप्त नहीं है। दादाभाई नौरोजीने इस अनुच्छेदको भारत-मन्त्रीके नाम लिखे अपने २४ जुलाई के पत्रमें “जोहानिसबर्ग के एक समाचारदाताले प्राप्त पत्र" के अंशके रूपमें उद्धृत किया था । समाचारदाता स्वयं गांधीजी थे । यद्यपि इस पत्रमें दी हुई तारीखको गांधीजी मोर्चेपर थे, पर यह असम्भव नहीं कि उन्होंने इसे पहले ही लिख रखा हो।