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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/४१४

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३९३. भारतीय डोलीवाहक दल[]

दलका संगठन

[ जुलाई १९, १९०६ के पूर्व ]

वतनियोंके विरुद्ध की जानेवाली सैनिक कार्रवाईके सम्बन्ध में, प्रयोगके तौरपर नेटाल सरकारके आदेश से यह दल बनाया गया है। इसमें बीस[]भारतीय हैं, जिनके नाम निम्नलिखित हैं :

मो० क० गांधी (सार्जेंट मेजर), यू० एम० शेलत (सार्जेंट), एच० आई० जोशी (सार्जेंट), एस० बी० मेढ़ (सार्जेंट), प्रभु हरि (कॉरपोरल), खान मुहम्मद, जमालुद्दीन, मुहम्मद, शेख मदार, शेख दादामियाँ, मुहम्मद ईसप, पूती नायकन, अप्पासामी, किस्तमा, कुप्पुसामी, बोमाया, कुंजी, अजोध्यासिंह ।

मजहबके लिहाज से दलमें छः मुसलमान और चौदह हिन्दू हैं। भौगोलिक दृष्टिसे पाँच बम्बई प्रेसिडेन्सीसे, बारह मद्रास प्रेसिडेन्सीसे, दो पंजाबसे और एक बंगाल प्रेसिडेन्सीसे आये हुए हैं। यह भी कह देना चाहिए कि बारह मद्रासियोंमें एक इसी उपनिवेशमें पैदा हुआ है ।

जहाँतक हैसियतका सम्बन्ध है, इनमें से तेरह कभी-न-कभी नेटालमें गिरमिटके अधीन रहे हैं और अब आजाद होकर माली, घरेलू नौकर आदिके रूपमें काम कर रहे हैं। पेशेके लिहाज से इनमें से दो इंजिन चालक हैं; एक सुनार है; तीन एजेंट और मुनीम हैं, जिन्होंने भारतमें उच्च शिक्षा प्राप्त की है; और एक बैरिस्टर है।

अब यह सुविदित है कि सरकारने वर्दी और भोजनका प्रबन्ध किया है और नेटाल भारतीय कांग्रेस उनको वेतन देती है ।

मोर्चेपर

जून २२ को यह दल सुबहकी गाड़ीसे स्टँजरके लिए रवाना हुआ और वहाँ बी० एम० आर० टुकड़ीसे, जो कि कर्नल आरनॉटके अधीन थी, जा मिला। कर्नल आरनॉट उस समय स्टैंजरकी छावनी में डेरा डाले हुए थे । टुकड़ीके सार्जेंट मेजरसे सलाह-मशविरा करनेके बाद कर्नल आरनॉटने आदेश दिया कि इस डोलीवाहक दलको यूरोपीय भोजन मिला करे और मांसके बदले चावल, दाल तथा पिसा मसाला दिया जाये। इस पत्र में पाठकोंकी जानकारीके लिए एक व्यक्तिका दैनिक राशन नीचे दिया जाता है :

डबल रोटी या बिस्कुट १ पौंड, चीनी ५ औंस, चाय द्वे औंस, काफी ३ औंस, मक्खन १ औंस, नमक ई औंस, मुरब्बा २ औंस, पनीर २ औंस, आलू ४ औंस, प्याज २ औंस, दक्षिण आफ्रिकी ज्वारका आटा ४ औंस, चावल १ पौंड, मसूरकी दाल पौंड तथा काली मिर्च ।

चूंकि कर्नल आरनॉटकी सैनिक टुकड़ीके साथ कोई चिकित्साधिकारी नहीं था, इसलिए कर्नलने थोड़ी मात्रामें तत्कालिक आवश्यकताकी औषधियाँ और कुछ पट्टियां देनेका आदेश दिया । हमारे पास रेडक्रॉसकी पट्टियाँ देखकर बहुत-से सैनिकोंने, जो दुर्घटनाजनित मामूली चोटोंसे पीड़ित थे या

  1. १. मोर्चेपरसे गांधीजीने दो संवादपत्र भेजे थे, जो “हमारे मोर्चा-स्थित विशेष संवाददाता द्वारा प्रेषित "रूपमें इंडियन ओपिनियन में छपे थे। यह उनमेंसे पहला संवादपत्र था।
  2. २. वस्तुतः सूचीमें केवल १८ व्यक्तियोंके नाम हैं