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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/४३८

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

हम पूछते हैं कि " उचित और न्याय्य" व्यवहारके विषय में तीन बार दोहराई हुई घोषणाका सचमुच कोई आधार है या वह लॉर्ड लिटनके इन शब्दोंको, कि " जो बातें वादोंके रूपमें सुनाई जाती हैं, वे व्यवहारमें तोड़नेके लिए होती हैं", चरितार्थ करेगी और श्री डंकनकी घोषणाका परिणाम केवल शब्दों में ही खुप जायेगा ?

[ अंग्रेजीसे ]
इंडियन ओपिनियन, ११-८-१९०६
 

४१०. भाषण : हमीदिया इस्लामिया अंजुमनमें

 

मलायी वस्तीकी सत्रहवीं गलीके सभा भवनमें जोहानिसबर्ग की हाल ही में स्थापित हमीदिया इस्लामिया अंजुमनके तत्वावधानमें भारतीयोंका एक सम्मेलन हुआ था। आमन्त्रित व्यक्तियोंमें ब्रिटिश भारतीय संघ के अध्यक्ष श्री अब्दुल गनी, और मन्त्री श्री गांधी, सम्मिलित थे । टान्सवालवासी भारतीयोंकी वर्तमान राजनीतिक स्थिति समझानेके लिए अंजुमनके अध्यक्ष निवेदन करनेपर गांधीजीने एक भाषण दिया था, जिसकी संक्षिप्त रिपोर्ट निम्नलिखित है:

जोहानिसबर्ग,
अगस्त १२, १९०६

श्री गांधीने शुरू में मोदिया इस्लामिया अंजुमनका आभार मानते हुए अंजुमनकी स्थापना के सम्बन्ध में अपनी प्रसन्नता व्यक्त की। हमीदिया इस्लामिया अंजुमन ब्रिटिश भारतीय संघके मुकाबलेमें खड़ी की गई है, ऐसी गलत चर्चा लोगों में चल रही थी । उसपर खेद प्रकट करते हुए उन्होंने कहा कि यह बात बिलकुल गलत है; ऐसी अंजुमनकी स्थापनासे तो उलटे ब्रिटिश भारतीय संघकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी, और भविष्य में वे एक-दूसरेके सहायक बन जायेंगे ।

ट्रान्सवालके भारतीयों की वर्तमान राजनीतिक स्थितिके प्रश्नपर आते हुए उन्होंने श्री डंकनके बयानको लेकर विस्तारपूर्वक समझाया कि मामला बहुत ही भयंकर है। श्री डंकनके बयानके विरुद्ध मजबूत मोर्चा बाँधने की जरूरत बताते हुए उन्होंने विलायतको शिष्टमण्डल भेजना स्थगित करने की सलाह दी। ब्रिटिश भारतीय संघकी कमजोर आर्थिक स्थिति बताकर उन्होंने उपस्थित सदस्योंसे निवेदन किया कि वे उसकी आर्थिक सहायता करें। उन्होंने कहा कि मुसलमान लोग शिक्षा में पिछड़े हुए हैं, इसलिए ऐसी समितियोंके बनने से उन्हें बहुत फायदा होगा; और आशा है, आप शिक्षाके विषय में आगे बढ़नेकी कोशिश करेंगे।

[ गुजरातीसे ]
इंडियन ओपिनियन, २५-८-१९०६