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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/४४४

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४०८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय रहनेवालोंको लम्बी अवधिका पट्टा नहीं दिया जायेगा; परन्तु उन्हें क्लिपस्प्रूटमें पट्टेपर जमीन दी जायेगी । समितिने इस जवाबका विरोध करना तय किया है।

[ गुजरातीसे ]
इंडियन ओपिनियन, २५-८-१९०६
 

४१६. स्वर्गीय उमेशचन्द्र बनर्जी

श्री उमेशचन्द्र बनर्जीके देहावसानका समाचार हम दुःखपूर्वक प्रकाशित करते हैं। उनकी गिनती आधुनिक कालके सबसे बड़े भारतीय देशभक्तोंमें थी । वे उन देशभक्तोंमें थे जिन्हें नौरोजीकी परम्पराका कहा जा सकता है और जो अपने समय एवं बुद्धि-बलका पूरा उपयोग अपने देशके हितके लिए किया करते थे। श्री बनर्जी बंगालके अग्रगण्य वैरिस्टरोंमें से थे और उन्होंने अपने सूक्ष्म कानूनी ज्ञान तथा नैय्यायिक वाग्मिताके कारण अपने कार्यकालके आरम्भमें ही ख्याति पा ली थी। इससे उन्हें असाधारण प्रभावको प्राप्ति हुई, जिसका उपयोग उन्होंने अपने देशके लाभके लिए किया। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसके जन्मदाताओंमें से एक थे, और उसके प्रथम अध्यक्ष भी थे। वे अपने जीवनके अन्तिम दिन तक उसकी सेवा करते रहे और मुक्तहस्त होकर अपना धन सार्वजनिक कार्योंमें लगाते रहे ।

श्री बनर्जीका पाश्चात्य शिक्षामें बहुत विश्वास था । वे स्वयं उसकी एक श्रेष्ठ उपज थे । इसलिए उन्होंने क्रायडनमें एक मकान खरीदा था । वहाँ वे अपना आधा समय अपने बच्चोंकी शिक्षाकी देखरेख में खर्च करते थे । फलतः उनके लड़कों एवं लड़कियोंको उदार शिक्षा मिली है जिसका उपयोग वे भी अपने पिताकी भांति सार्वजनिक सेवामें कर रहे हैं ।

श्री बनर्जीके जैसे जीवन से वर्तमान पीढ़ीके भारतीय युवकोंको अनेक शिक्षाएँ मिलती हैं। अतः स्वर्गीय आत्माके प्रति भारतीय अपनी सर्वोत्तम श्रद्धांजलि उनके उदाहरणके अनुकरणके रूपमें ही दे सकते हैं। हम आदरपूर्वक श्री बनर्जी के कुटुम्बके प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट करते हैं। उसकी क्षति भारतकी भी क्षति है ।

[ अंग्रेजीसे ]
इंडियन ओपिनियन, २५-८-१९०६