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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/४५४

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४२६. तार : 'इंडिया 'को

एशियाई - अध्यादेशका जो मसविदा प्रकाशित किया गया भंग करता है, और है । जोहानिसबर्ग अगस्त २८, १९०६ है, सब पिछले वादोंको बोअर शासनसे लिये गये वर्तमान कानूनसे बदतर सालसे ऊपरके बच्चोंके लिए स्त्रियों और आठ करके वह भारतीयोंकी भावनाको धक्का पहुँचाता है। बार पंजीयन करानेके लिए कानूनन बाध्य किया जा पंजीयन कराना जरूरी भारतीयोंने, जिन्हें दो चुका है, पिछली बार लॉर्ड मिलनरको प्रसन्न करनेके लिए स्वेच्छासे पंजीयन करा लिया था। यह तीसरा पंजीयन अनावश्यक भी है और अत्याचारपूर्ण भी । प्रस्तावित अध्यादेशका करना है, जिसके सामने सिर झुकानेसे भारतीय पुराने मंशा मनमाना अपमान कानूनका जारी रहना और एक जाँच आयोगकी पसन्द करते हैं । करते हैं। गैरकानूनी प्रवेशके आरोपका प्रतिवाद नियुक्तिका निवेदन किया जाता है। [ अंग्रेजीसे ] इंडिया, ३१-८-१९०६ ४२७. जापानके वीर कोडामा गत मास टोकियोमें बिना किसी बीमारीके एकाएक जनरल कोडामाका देहान्त हो गया । वे जापानकी समुराई नामक क्षत्रिय जातिमें पैदा हुए थे, और इसलिए स्वभावतः ही कुशल सैनिक थे। इसके सिवा वे एक नामी रणनीतिज्ञ थे । उनके मरनेसे जापानकी सेनामें एक बड़ी कमी आ गई है। सन् १८७२ में वे जापानी सेना में भरती हुए। वहाँ तुरन्त ही उनकी कुशलता प्रकट हुई और उसके कारण वे सेनामें बढ़ने लगे । सन् १८८० में उन्हें लेफ्टिनेंट कर्नलका ओहदा मिला। आगे चलकर १९०४ में वे जनरल हुए। पिछले रूसी जापानी युद्धके समय वे मार्शल कोयामाके मुख्य सरदार थे । जापानी लोगोंके स्वभाव के अनुसार लड़ाईके समय वे हमेशा बहुत ही धैर्यवान और गम्भीर रहते थे, कभी भी उतावली नहीं करते थे । लाईयांगके खूंख्वार युद्धके समय जब रूसी सेनाने जापानियोंपर भयंकर हमला किया, उस समय वे नाश्ता कर रहे थे । रूसी हमला सेनापति कोडामाके डेरेकी तरफ ही शुरू हुआ था । इसलिए साथी सैनिकोंने अपने सरदारको सुरक्षाकी दृष्टिसे निर्भय स्थानपर जानेको कहा। तब उन्होंने उत्तर दिया 'ऐसा हो ही नहीं सकता। मुझे भागता हुआ समझकर मेरे सिपाही भयवश शंकित हो जायेंगे । इसलिए यहीं रहना अच्छा है।" अपने नायककी ऐसी हिम्मतसे सैनिकोंकी हिम्मत बढ़ी और वे रूसी छापेको पीछे ढकेलनेमें कामयाब हुए। --- सेनापति कोडामाका शारीरिक गठन और रूप-रंग अंग्रेजों जैसा था। १६ वर्षकी उम्र में जापानकी सरकारने उन्हें पश्चिमी युद्ध कलाका अभ्यास करनेके लिए यूरोप भेजा था। उस Gandhi Heritage Portal