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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/४६२

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४३५. हिन्दू - श्मशान

हिन्दुओंके श्मशानकी स्थिति के बारेमें हमने पहले लिखा है []। जान पड़ता है कि कुछ लोगोंने उसका अर्थ यह किया है कि उसमें हम व्यवस्थापकोंको उलाहना देना चाहते हैं । हम फिरसे उस लेखको पढ़ गये हैं । किन्तु उसका वैसा अर्थ हम नहीं कर सके। फिर भी हमारे लेखका भूलसे भी यह अर्थ न हो, इसलिए हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि हमने अपनी आलोचना में व्यवस्थापकोंको दोषी नहीं माना है । हमारी जानकारीके अनुसार उन्होंने श्मशानको स्वच्छ और व्यवस्थित रखनेका पूरा प्रयत्न किया है ।

[ गुजरातीसे ]
इंडियन ओपिनियन, ८-९-१९०६


४३६. पत्र : उपनिवेश-सचिवको

ब्रिटिश भारतीय संघ

जरूरी

[ जोहानिसबर्ग ]
सितम्बर ८, १९०६


महोदय,

मैं परमश्रेष्ठसे परममाननीय भारत-मन्त्री और परमश्रेष्ठ भारतके वाइसरायके नाम संलग्न तारोंको[]उनकी सेवामें भेजनेकी प्रार्थना करता हूँ ।

आप देखेंगे, भारतके परमश्रेष्ठ वाइसरायके नामके तारका पाठ अन्य दो तारोंसे[] अलग है। मेरे संघने मुझे अधिकार दिया है कि मैं तारोंका खर्च चुका दूं । आपका पत्र पानेपर मैं सेवा में चेक भेज दूँगा । चूंकि बात अत्यावश्यक है, मैं विनम्रतापूर्वक निवेदन करता हूँ कि ये तार आज ही भेज दिये जायें।

आपका, आदि,
अब्दुल गनी
अध्यक्ष

[ अंग्रेजीसे

प्रिटोरिया आर्काइव्ज़ : एल० जी० फाइल सं० ९३ : एशियाटिक्स

 
  1. १. देखिए 'हिन्दुओं के श्मशानकी स्थिति', पृष्ठ ४१० ।
  2. २. देखिए आगेके शीर्षक ।
  3. ३. भारत तथा उपनिवेश- मन्त्रियों के नाम ।