साथ हों तो उनको अनुमतिपत्र लेनेकी आवश्यकता नहीं है। क्या अब भारतीय स्त्रियोंको अनुमतिपत्र कार्यालय में जाना पड़ेगा और थका डालनेवाली तथा झुंझलाहट पैदा करनेवाली जाँचके पश्चात् अपना अनुमतिपत्र हासिल करना पड़ेगा ? और फिर गोदके बच्चोंका क्या होगा ? यह कोई अलिफ लैलाका किस्सा नहीं है। जो बच्चे मुश्किलसे रेंगकर चल सकते हैं उनको भी फोक्सरस्टमें रोका गया है। क्या श्री लवडे और उनके साथियों तक को इस सबकी जरूरत है ? क्या आपको है ?
आपका, आदि,
मो० क० गांधी
स्टार, १९-९-१९०६
४५०. पत्र : डॉ० एडवर्ड नंडीको
२१-२४ कोर्ट चेम्बर्स
जोहानिसबर्ग
सितम्बर २०, १९०६
यदि अदालतमें जानी-मानी प्रतिष्ठा और योग्यतावाले व्यक्ति हों तो आपके दोनों प्रश्नोंपर[१] मेरा उत्तर स्वीकारात्मक है ।
आपका,सच्चा,
मो० क० गांधी
जेकब चेम्बर्स
कोर्ट रोड
जोहानिसबर्ग ]
प्रिटोरिया आर्काइव्ज़ : एल० जी० फाइल सं० ९३ : एशियाटिक्स
- ↑ १. प्रश्न निम्नलिखित थे : " (क) इस उपनिवेशमें कुछ भारतीयोंके गैरकानूनी तरीकेसे आनेकी बात कही गई है और उनकी संख्या के बारेमें ब्रिटिश भारतीयोंके प्रतिनिधियों और एशियाई विभागके अधिकारियोंका अन्दाज मेल नहीं खाता। यह देखते हुए क्या आप किसी ऐसे आयोग या अदालतका निर्णय स्वीकार कर सकेंगे जिसका एक व्यक्ति न्यायाधीश और दूसरा व्यक्ति गैरसरकारी, अदालती जाँच करनेमें समर्थ तथा निष्पक्ष हो ? (ख) जो भारतीय कानूनन इस उपनिवेशमें लौट सकते हैं किन्तु जिन्हें किसी कारण टान्सवालमें प्रवेशकी अनुमति प्राप्त नहीं हो सकी है, वे इस समय चाहे भारतमें हों चाहे और कहीं; क्या उनके बारेमें उक्त आयोगके एकमत फैसलेको निर्णायक मान सकेंगे ? यदि अदालतके दोनों सदस्योंमें मतभेद हो तो उस हालतमें कोई भी पक्ष सर्वोच्च न्यायालयके सामने अपील कर सकता है । "