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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/४८४

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४४८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय प्रशंसनीय थे और वे स्त्री-शिक्षाके दृढ़ पक्षपाती थे। उन्होंने न केवल मुसलमानोंमें अपने भाषणसे स्त्री शिक्षाका प्रचार किया, बल्कि स्वयं अपने कुटुम्बमें भी उसका उदाहरण पेश किया। उनकी अपनी लड़कियोंने विश्वविद्यालयकी प्रथम कोटिकी शिक्षा प्राप्त की है। हम स्वर्गीय श्री तैयबजीके कुटुम्बके प्रति अपनी सादर समवेदना प्रकट करते हैं । [ अंग्रेजीसे ] इंडियन ओपिनियन, २२-९-१९०६ ४५३. ट्रान्सवालके भारतीयों द्वारा विरोध पुराने एम्पायर नाटक घरमें जो विशाल भारतीय सभा' हुई थी, उसका परिणाम प्रकट होने लगा है । 'रैंड डेली मेल' ने ट्रान्सवाल अध्यादेश के मसविदेके विरुद्ध किये गये उस आन्दोलनकी, जिसकी परिणति जोहानिसबर्ग में हुए हालके महान प्रदर्शन में हुई, बंग-भंग आन्दोलनसे झूठी तुलना की है और उक्त सभाकी हँसी उड़ाई है। इस उपहाससे प्रकट होता है कि सभाका महत्त्व अनुभव किया गया है । 'स्टार' तो इस सभाके कारण बौखला गया है । वह दक्षिण आफ्रिकियोंको भड़काता कि ब्रिटिश भारतीयोंने अध्यादेशके विरुद्ध जो सत्याग्रह करनेका निश्चय किया है उसके जवाब में उन्हें ट्रान्सवालसे भारतीयोंको बलपूर्वक निकाल देनेका आन्दोलन आरम्भ करना चाहिए । न तो 'डेली मेल' ने और न 'स्टार' ने अध्यादेशको समझने या उसका अध्ययन करनेका कष्ट उठाया है। उनके लिए यह पंजीयन करानेकी एक निर्दोष प्रणाली है । यदि इस अध्यादेशको पंजीयन अध्यादेश' का गलत नाम देनेके स्थानपर 'संदिग्धों या अपराधियोंकी पहचानका अध्यादेश' नाम दिया गया होता तो कदाचित् हमारे सहयोगियोंने इसकी भयंकरताका अनुभव किया होता। जैसा कि 'डेली मेल' कहता है, यह जरूरी नहीं है कि हम सरकारपर जानबूझकर भारतीयोंका अनावश्यक अपमान करनेका दोषारोपण करें। अध्यादेश स्वयं स्पष्ट है। यह बात समझ ली जानी चाहिए कि भारतीयों के पास पहलेसे ही ऐसे पंजीयन प्रमाणपत्र हैं, जिनमें अँगूठेके निशानके साथ तफसीलसे सब बातें दी गई हैं, ताकि प्रमाणपत्रवालेकी ठीक पहचान की जा सके । नये अध्यादेशमें अब पहचानकी एक ऐसी प्रक्रियाकी व्यवस्था की गई है, जिसका आयोजन भविष्य में समय-समयपर बदलते रहनेवाले विनिमयोंके अनुसार होगा । 'स्टार' जिसे, मालूम पड़ता है, सरकारका विश्वास प्राप्त है, हमें सूचित करता है कि शिनाख्तकी नई प्रणाली प्रमाणपत्रोंके अनुचित उपयोग या दुरुपयोगका पता लगानेके लिए काफी सख्त होगी । 'स्टार' द्वारा दी गई सूचनाके बिना भी यह अनुमान करना सर्वथा उचित है कि नई प्रणाली वर्तमान प्रणालीसे अवश्यमेव ज्यादा कठोर होगी, क्योंकि श्री डंकनने हैरतमें डाल देनेवाले आत्मविश्वासके साथ घोषणा की है कि वर्तमान प्रणाली अपर्याप्त है । हमारे पास यह विश्वास करनेके कारण हैं कि अध्यादेशके प्रथम वाचनके समय तक प्रचलित प्रणालीकी जानकारी श्री डंकनको नहीं थी। पर यह तो प्रसंगवश कह दिया गया है, और भारतीय मामलोंके बारेमें ट्रान्सवालमें जो उपेक्षा और अज्ञता आम तौरपर देखनेको मिलती है उसके अनुरूप ही है । भारतीय समाजने ब्रिटिश शासनके अन्तर्गत पहला पंजीयन अपनी इच्छासे कराया था। इस आत्मोत्सर्गपूर्ण शिष्टाचारको सरकारने गलत समझा है। उसने समझा कि भारतीय ऐसे दब्बू १. देखिए “सार्वजनिक सभा", पृष्ठ ४३०-४ | Gandhi Heritage Portal