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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/४९३

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पत्र: प्रवासी प्रतिबन्धक अधिकारीको ४५७ मैं विश्वास करता हूँ कि आपके डर्बन स्थित संवाददाताने जिस समाजपर ऐसा बर्बरता- पूर्ण लांछन लगाया है, उसके साथ न्याय करनेके लिए आप या तो उस अधिकारीका नाम प्रकाशित करेंगे जिसने आपके संवाददाता द्वारा उल्लिखित जानकारी दी, या उसे अपने द्वारा दिये गये वक्तव्यको वापस ले लेनेको कहेंगे । १ [ अंग्रेजीसे ] [ आपका, आदि, मो० क० गांधी ] इंडियन ओपिनियन, २९-९-१९०६ ४५८. पत्र : प्रवासी प्रतिबन्धक अधिकारीको सेवामें [ जोहानिसबर्ग ] सितम्बर २२, १९०६ मुख्य प्रवासी प्रतिबन्धक अधिकारी डर्बन [ महोदय, ] मैं इसके साथ 'ट्रान्सवाल लीडर' की एक कतरन नत्थी कर रहा हूँ । उसमें उन कुछ धाराओंका उल्लेख है जो ट्रान्सवालके एशियाइयोंको अनुमतिपत्र देनेके सम्बन्धमें बनाई गई हैं । १. गांधीजीके पत्रके जवाब में ९-१०-१९०६ के ट्रान्सवाल लीडर में निम्नलिखित स्पष्टीकरण प्रकाशित हुआ था : “ब्रिटिश भारतीय प्रजाजनोंको ट्रान्सवाल उपनिवेशमें प्रवेश करनेके लिए अनुमतिपत्र देने तथा इस आरोपके बारेमें, कि जिन महिलाओंको पत्नियाँ बताया जाता है वे 'प्रायः दुश्चरित्र' हुआ करती हैं, चन्द रोज पहले कुछ वक्तव्य प्रकाशित हुए थे। उनके सम्बन्धमें गत सोमवारका नेटाल मर्क्युरी इस प्रकार लिखता है : जोहानिसबर्गसे श्री मो० क० गांधीने हमारे पिछले महीनेकी २१ तारीखके अंक में प्रकाशित एक लेखके विषय में पत्र भेजा है। उक्त लेखमें पूनिया नामकी एक भारतीय महिलाको, उसके पास अनुमतिपत्र न होनेकी विनापर, फोक्सर स्टमें रोक लिये जाने का विवरण छपा था। श्री गांधी लेखकी कतिपय बातोंसे, जिन्हें वे ट्रान्सवालकी भारतीय महिलाओं पर अनुचित लांछन लगाना मानते हैं, असन्तुष्ट हैं। घटना के उपरान्त हमने डर्बनमें सुलभ सभी सूत्रोंसे जानकारी प्राप्त करनेका प्रयास किया। लेकिन, यह स्पष्ट होगा कि यहाँ नेटालमें ट्रान्सवालके मामलोंकी पूरी जानकारी करने के लिए वैसी ही सुविधाएँ- उदाहरणार्थ, जिस तरहकी सुविधाएँ श्री गांधीको सुलभ हैं -- नहीं हैं, जैसी श्री गांधीके निवासस्थान जोहानिसबर्ग में हैं। और किसी भी निराधार तथा अतिरंजित वक्तव्यका कारण यही है। श्री गांधी जोरदार शब्दोंमें इस बातको अस्वीकार करते हैं कि ट्रान्सवालके अधिवासी भारतीय दुश्चरित्र औरतोंको अपनी पत्नियाँ बताकर उन्हें ट्रान्सवालमें प्रवेश दिलानेकी चेष्टा कर रहे हैं । इस बात को साबित करनेके लिए उन्होंने सरकार तथा अन्य सूत्रोंसे पूछताछ की है और उसका फल हुआ है अस्वीकृति । अतः, वक्तव्य अवश्य ही वापस ले लिया जाना चाहिए, क्योंकि यह निश्चित तथ्योंके अनुरूप नहीं है। जनता इस बातसे अवगत हो जाये, यह अच्छा है; और श्री गांधी भी हमें आश्वस्त करते हैं कि उन्हें इस तरहका एक भी मामला ज्ञात नहीं है। J हमारे डर्बन स्थित संवाददातासे प्राप्त समाचारोंके आधारपर इस अखबार में भी उसी तरहके वक्तव्य प्रकाशित किये गये थे, और अनुमानतः वे उसी सूत्रसे प्राप्त भी हुए थे । अतः, यह उचित ही है कि इस प्रत्याख्यानको समान रूपसे प्रचारित किया जाये । बादमें यह १३-१०-१९०६ के इंडियन ओपिनियन में उद्धृत किया गया । Gandhi Heritage Portal