जोहानिसबर्ग की चिट्ठी लॉर्ड सेल्बोर्नका दूसरा पत्र ४५९ उपर्युक्त प्रस्ताव स्वीकार होने के साथ ही लॉर्ड सेल्बोर्नका पत्र मिला। उसमें उन्होंने विशेष तफसीलके साथ बताया है कि नया अध्यादेश इस हफ्ते रवाना होगा और विलायत पहुँचनेके बाद यदि उसे सम्राटकी मंजूरी मिलनी होगी तो मिल जायेगी। इसमें ज्यादा डरनेकी बात नहीं है । सम्भावना तो इस बात की है कि शिष्टमण्डलके लौटनेसे पहले विधेयक मंजूर होकर वापस नहीं आयेगा । शिष्टमण्डलका खर्च शिष्टमण्डलका खर्च समितिने ९०० पौंड तक मंजूर किया है। उसमें से ३०० पौंड श्री अलीके घर-खर्च वगैराके लिए मंजूर किये गये हैं। श्री अलीने इस विषयमें कहा है कि यदि उन्हें आवश्यक मालूम हुआ तो वे उसमें से कुछ रकम विलायतमें सार्वजनिक काममें भी लगायेंगे। शेष ६०० पौंड रहे, सो शिष्टमण्डलके खर्च में काम आयेंगे । और समितिको उसका तफसीलवार हिसाब दिया जायेगा । शिष्टमण्डल के सदस्य शिष्टमण्डलके सदस्य श्री गांधीके बारेमें यहाँ लिखनेकी आवश्यकता नहीं। श्री हाजी वजीर अलीका जन्म १८५३ में मॉरिशसमें हुआ था । उनकी शिक्षा-दीक्षा भी मॉरिशसमें हुई । १८६८ में उन्होंने व्यवसाय शुरू किया और मुद्रककी हैसियतसे 'कर्मशियल गज़ट' के दफ्तर में भरती हुए । उन्होंने १८७३ में जहाज-गोदामके कारकुनका काम किया और वे १८७६ में चार्ल्स जेकब व सन्सके यहाँ जहाजी कारकुन बने। इसके बाद इन्होंने मक्का शरीफकी यात्रा की और वे हाजी बने । १८८४ में केप टाउनमें आये और वहाँ अपना सोडावाटरका धन्धा शुरू किया । १८८५ में उन्होंने सार्वजनिक काम शुरू किया। मलायी लोगोंका कब्रिस्तान सरकार बहुत दूर ले जाना चाहती थी। लेकिन मलायी लोगोंने उसका विरोध किया। उस समय हुल्लड़का डर था । श्री अलीने मध्यस्थताकी और शान्ति स्थापित हुई । कब्रिस्तानकी जगह दूर थी, सो पास नियत की गई । श्री अली केप टाउनमें विधानसभा और नगरपालिका, दोनोंके मतदाता थे । वे चुनावोंमें हमेशा खासा हिस्सा लेते थे । १८९२ में केप टाउनसे किम्बर्ले वगैरह गये। वहाँ काले लोगोंके संघके प्रमुख बने । जब केपमें चुनावका कानून बना तब बाइस हजार काले आदमियोंकी सहीसे एक अर्जी विलायत भेजी गई थी। उसमें श्री अलीका मुख्य हाथ था । १८९२ के बादसे श्री अली जोहानिसबर्ग में रह रहे हैं। ट्रान्सवालमें श्री अली ब्रिटिश राजदूत और दूसरे प्रसिद्ध लोगोंसे भारतीयोंकी समस्याके सम्बन्धमें मिल चुके हैं। उन्होंने हमीदिया इस्लामिया अंजुमनकी स्थापना की और अभी वे उसके अध्यक्ष हैं। यह समिति बहुत अच्छा काम करती है। इसके बहुत से सदस्य हो गये हैं और यह उत्साहपूर्वक काम कर रही है, यह सब जानते हैं । श्री अलीका बड़ा कुटुम्ब है । उनके ग्यारह बच्चे हैं । वे स्वयं उन्हें उत्तम शिक्षा देते हैं ।" [ गुजरातीसे ] इंडियन ओपिनियन, ६-१०-१९०६ 1 १. “ हाजी वजीर अली, पृष्ठ ४७२-३ भी देखिए । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/४९५
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