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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/५०१

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४६६. ट्रान्सवाल अनुमतिपत्र अध्यादेश तारीख १५ को शान्ति-रक्षा अध्यादेश के अन्तर्गत किन्हीं हाफिजी मूसा तथा उनके पुत्र मुहम्मद हाफिजी मूसाका मुकदमा फोक्सरस्टके मजिस्ट्रेटके इजलास में पेश हुआ; पितापर यह आरोप था कि उसने अनुचित साधनोंसे प्राप्त अनुमतिपत्र द्वारा ट्रान्सवालमें प्रवेश करनेके लिए अपने पुत्रको, जो ग्यारह सालसे कम उम्रका माना गया है, उकसाया है; और लड़केपर यह आरोप था कि उसने अनुचित साधनोंसे प्राप्त अनुमतिपत्र द्वारा उपनिवेशमें प्रवेश किया है। इस आशयकी गवाही पेश की गई कि ५ जुलाईको पिता और पुत्रने साथ-साथ यात्रा की और वे फोक्सरस्टसे गुजरे। वहाँ उनकी जाँच की गई। पिताने अपना अनुमतिपत्र पेश किया और पुत्रने, ऐसा कहा जाता है, भाइमा नामके व्यक्तिको दिया गया अनुमतिपत्र पेश किया। निरीक्षक सिपाही यह कहने में असमर्थ था कि उपर्युक्त अनुमतिपत्र लड़केने ही पेश किया था। लड़केके अँगूठोंकी निशानियाँ ली गईं और प्रिटोरिया भेजी गईं। और चूंकि वे भाइमाको दिये गये अनुमतिपत्रके अद्धशपर मौजूद अँगूठेकी निशानियोंसे नहीं मिलीं, इसलिए पिता और पुत्र दोनों पाँचेफस्ट्रममें गिरफ्तार कर लिये गये। एशियाई पंजीयन कार्यालयके प्रधान लिपिक श्री कोडीके बयान से यह भी प्रकट हुआ कि हर उम्र के ब्रिटिश भारतीयोंको, चाहे वे पुरुष हों या स्त्री – स्त्रियोंको, भले ही वे अपने पतियोंके साथ हों, और बच्चोंको, भले ही वे अपने माता-पिताओंके साथ हों -- अपने अलग-अलग अनुमतिपत्र पेश न करनेपर गिरफ्तार कर लिया जाये, यह अनुमति- पत्र कार्यालयका निर्देश है। पिता-पुत्र दोनोंने इस बातसे इनकार किया कि पुत्रने भाइमाके नाम दिये गये अनुमतिपत्रसे उपनिवेशमें प्रवेश किया है । मजिस्ट्रेटने पिताको बरी कर दिया, किन्तु पुत्रको अपराधी ठहराया और ५० पौंड जुर्मानेकी या तीन मासकी सादी कँदकी सजा सुना दी अपील दर्ज कर ली गई है। यह मामला बड़े महत्त्वका समझा जाता है; क्योंकि अपने पिताके साथ सफर करते हुए कच्ची उम्रके एक लड़केको इतनी सख्त सजा दी गई है, यद्यपि मजिस्ट्रेट बाल अपराधियोंके मामलोंमें प्राप्त छूटके विशेषाधिकारोंको ध्यानमें रखकर कार्य करते हैं । [ अंग्रेजीसे ] इंडियन ओपिनियन, २९-९-१९०६ I ५-३० Gandhi Heritage Portal