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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/५०५

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टान्सवालका कानून ४६९ द्वारा एशियाइयोंकी बहुत कुछ असुविधाएँ दूर हो जायेंगी। इससे ज्यादा सुधार ऐसे समयमें नहीं किया जा सकता जब स्वराज्य दिया ही जानेवाला है। लॉर्ड एलगिनने यह भी कहलाया है कि जो प्रतिनिधि विलायत जायेंगे उन्हें अपने विचार प्रकट करनेका पूरा मौका दिया जायेगा। लेकिन उससे कुछ लाभ होगा, ऐसा वे नहीं मानते । पत्रका अर्थ इस पत्रका अर्थ यही हुआ कि लॉर्ड एलगिनने शिष्टमण्डलको न भेजनेके लिए कहा है। कानून पास हो जानेके बाद यदि शिष्टमण्डल गया तो स्पष्ट ही उससे कुछ लाभ न होगा । इस पत्रका अर्थ यह भी होता है कि भारतीय प्रजाने जो जोर दिखाया है और कानूनका मुकाबला करनेका प्रस्ताव किया है उसे दबाया जाये। यह अंग्रेजोंका रिवाज है कि जो लोग अधिक बढ़ते दिखाई दें, उनकी ओर सख्त नजर की जाये और उन्हें जोरसे पछाड़ा जाये । लॉर्ड सेल्बोर्नने लॉर्ड एलगिनको यह सलाह दी होगी कि यदि शिष्टमण्डल विलायत जायेगा और उससे लॉर्ड एलगिन मिलेंगे तो भारतीयोंको कानून रद हो जानेकी आशा बँधेगी। इस बीचमें वे अपनी शक्ति भी बढ़ा लेंगे। इसलिए शक्तिका जो अंकुर फूटने ही वाला है, उसे इसी समय जला दिया जाये तो ठीक होगा। इस सलाहको मानकर लॉर्ड एलगिनने शिष्टमण्डलकी कहानी सुने बिना ही कानूनको पसन्द किया है । अधीनस्थ यानी पराजित प्रजाओंपर अंग्रेजी शासन इसी प्रकार चलता रहा है। बहुत हद तक इस व्यवहारमें वे सफल हुए हैं। क्योंकि पराजित और हततेज प्रजा बोलनेमें ही शूर होती है और जब कभी काम करनेका समय आता है, फिसल जाती है। हमारा कर्तव्य इस समय भारतीय प्रजाका क्या कर्तव्य है, इसपर विचार करें। कानून भंग करनेका जो प्रस्ताव स्वीकार किया गया है वह उत्साहवर्धक भी है और उत्साहनाशक भी। यदि उसपर भारतीय प्रजा डटी रही, तो उससे उसका ट्रान्सवालमें मान बढ़ेगा और उसके बहुतेरे दुख दूर हो जायेंगे; इतना ही नहीं, सम्पूर्ण दक्षिण आफ्रिकामें उसका फायदा दिखाई देगा और हमारी जन्मभूमिमें भी सैकड़ों व्यक्तियोंको फायदा होगा। लेकिन यदि प्रस्ताव भंग कर दिया गया, तो जिन्होंने शपथ ली है, उनकी प्रतिज्ञा टूटेगी, सारी कौमकी नाक कटेगी, बदतर कौमकी ओरसे जो अर्जियाँ भेजी जायेंगी उनका असर घट जायेगा, और स्थिति आजसे भी बदतर हो जायेंगी । गोरे हँसेंगे, सो तो अलग ही ; वे थुकेंगे, हमें लातें मारेंगे और नामर्द कहेंगे। हम एक राष्ट्र हैं, यह तो फिर माना ही न जायेगा । साहसके बिना सिद्धि नहीं मिलती महान कार्य करनेमें सदा ही ऐसी जोखिम उठानी पड़ती है। हम बड़ी जोखिम उठाकर व्यापार करते हैं, तब यदि लाभ हुआ तो वह भी बड़ा होता है, और यदि नुकसान हुआ, तो वह हमें मटियामेट कर देता है। हमारे कवि लिख गये हैं कि साहससे सिकन्दरने बादशाही भोगी, साहससे कोलम्बसने अमेरिकाको खोज निकाला । साहसके बिना सिद्धि नहीं मिलती। अंग्रेज कौम स्वयं साहसी है और साहसी राष्ट्रोंकी ही तारीफ करती है। इसलिए हरएक भारतीयका निश्चित कर्त्तव्य है कि वह दुबारा [पंजीयनपत्र ] लेने जानेके बजाय जेल जाये और एम्पायर नाटकघरमें जो शपथ ली है उसका दृढ़तापूर्वक पालन करे । १. आधुनिक गुजराती गद्य और पद्यके जनक नर्मदाशंकर लालशंकर दवे ( कवि नर्मद) की ओर संकेत है जिन्हें गांधीजी अक्सर उद्धृत किया करते थे । Gandhi Heritage Portal