४७० सम्पूर्ण गांधी वाङमय लॉर्ड सेल्बोर्नका दूसरा पत्र उपर्युक्त सलाहका समर्थन करनेवाला लॉर्ड सेल्बोर्नका दूसरा पत्र आया है। उसका अनु- वाद भी नीचे दिया गया है। ऊपर जिस पत्रका अनुवाद दिया गया है, वह लॉर्ड सेल्बोर्नने लॉर्ड एलगिनकी ओरसे लिखा है। अब वह खुद लिख रहे हैं । उसे देखिए : आपके संघ द्वारा दी गई दलीलोंसे मालूम होता है कि आप नये कानूनको समझते नहीं । जो प्रमाणपत्र जारी हो चुके हैं वे ठीक हैं या नहीं, इसकी जाँच करनेके लिए ही यह कानून बनाया गया है। इस कानून के अनुसार वर्तमान पंजीयनपत्र वापस लेकर नये दिये जायेंगे, जिससे उनसे सही-सही परिचय मिल सके; और सही परिचयके अभावमें आज जो तकलीफें उठानी पड़ती हैं वे न उठानी पड़ें। जबतक स्वराज्यकी स्थापना नहीं हो जाती, तबतक देशमें अधिक भारतीयोंका प्रवेश नहीं होना चाहिए और उसके लिए यदि पंजीकरण करना आवश्यक हो, तो वह पूरा होना चाहिए । 'एशियाई' शब्दकी परिभाषा और लड़ाईके पहले ट्रान्सवालमें रहनेवाले भारतीयोंकी स्थिति जैसी-की-तैसी रहती है। शराबके सम्बन्धमें जो संशोधन किये गये हैं वे भार- तीयोंके लिए नहीं, बल्कि ऐसे अन्य एशियाइयोंके लिए हैं जिन्हें यह कानून बाधक है । नया कानून स्त्रियोंपर लागू नहीं होगा, सिर्फ मर्दोंपर ही लागू होगा । नया कानून जानबूझ कर अन्यायपूर्ण बनाया गया है और वह लॉर्ड सेल्बोर्नके पिछले भाषणोंके विरुद्ध है, इसे लॉर्ड सेल्बोर्न स्वीकार नहीं करते । इस उत्तरसे मालूम होता है कि लॉर्ड सेल्बोर्नने नये कानूनको जानने या आज क्या स्थिति है, उसे समझनेकी तकलीफ नहीं की । जहाँ इतना अन्धेर हो, वहाँ हमारा एक ही कर्त्तव्य होना चाहिए; और वह यह कि जेल जाने के चौथे प्रस्तावपर अमल किया जाये। सरकार यह तत्काल समझ लेगी कि बगैर दुःखके हजार व्यक्ति जेल जाना मंजूर नहीं करेंगे । निधिकी आवश्यकता लेकिन जैसे जेल जानेकी आवश्यकता है, वैसे धनकी भी आवश्यकता है। शिष्टमण्डलके जानेसे जो खर्च होता उससे अब ज्यादा खर्च होगा। जो व्यक्ति जेलमें जायेंगे उनके सम्बन्धमें तार भेजना, उनके जानेके बाद व्यवस्था करना, यह सब बिना खर्चके नहीं होगा। फिर यह भी नहीं कहा जा सकता कि लड़ाई दो-चार दिनमें समाप्त हो जायेगी । मतलब यह कि धनकी पूरी आवश्यकता होगी। इस सम्बन्धमें हमारे लोग पिछड़े हुए हैं, यह पहले कहा जा चुका है। इसके लिए पूरी खबरदारी बरतना और एकता कायम रखना बहुत जरूरी है । [ गुजरातीसे ] इंडियन ओपिनियन, २९-९-१९०६ १. निम्नलिखित अनुच्छेद इंडियन ओपिनियनके सम्पादक द्वारा जोड़ दिया गया था : छपते-छपते प्राप्त समाचार " ऊपर की बातोंसे मालूम होता है कि अब शिष्टमण्डलको" भेजने की आवश्यकता नहीं रही। परन्तु हमें अभी-अभी तार मिला है जिससे मालूम होता है कि अध्यादेशको बढी सरकारकी स्वीकृति नहीं मिली है। इस तरह स्वीकृति प्राप्त होनेमें करीबन पाँच सप्ताह लग जाना सम्भव है। ऊपर जिन पत्रोंका उल्लेख किया गया है उन्हें पढ़नेसे मालूम होता है कि कुछ गलतफहमी हो गई है । इस सम्बन्धमें अगले सप्ताह विशेष स्पष्टीकरण पाना सम्भव है । ” Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/५०६
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