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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/५१४

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४७८ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय शामिल करनेपर, जैसी कि ऊपर बताई गई हैं, ब्रिटिश भारतीयोंकी ओरसे आयोगके सम्मुख आपत्तियाँ पेश की गई थीं। (१२) संघ महानुभावका ध्यान इस तथ्यकी ओर भी आकर्षित करता है कि अध्यादेश- से प्रभावित क्षेत्र मलय बस्तीसे लगा हुआ है जिसमें एशियाइयोंकी, मुख्यतः ब्रिटिश भारतीयोंकी बड़ी आबादी है। फोडडॉर्प और मलय बस्ती के निवासियोंके सम्बन्ध सदा ही सन्तोषजनक रहे हैं। (१३) संघ अनुभव करता है कि यदि उल्लिखत धाराएँ महानुभाव द्वारा मंजूर कर दी गई तो उनकी मंजूरी दूसरी नगरपालिकाओंके लिए नजीर बन जायेगी और उसके फल- स्वरूप ब्रिटिश भारतीय अन्ततः नौकर-चाकरोंके दर्जे में पहुँच जायेंगे और जबरदस्ती वस्तियों में भेज दिये जायेंगे । (१४) इसलिए प्रार्थी नम्रतापूर्वक प्रार्थना करता है कि उल्लिखित अध्यादेश नामंजूर कर दिया जाये, या ऐसी अन्य राहत दी जाये जो महानुभावको उचित प्रतीत हो । और न्याय तथा दयाके इस कार्यके लिए प्रार्थी सदा दुआ करेगा, आदि, आदि । जोहानिसबर्ग, तारीख ८ अक्तूबर, १९०६ दफ्तरी अंग्रेजी प्रतिको फोटो नकल (एस० एन० ४३८४ ) से । ४७८. शिष्टमण्डलकी यात्रा -- १ अब्दुल गनी अध्यक्ष ब्रिटिश भारतीय संघ [ जहाजपर अक्तूबर ११, १९०६ के पूर्व] नये एशियाई कानूनके सम्बन्धमें विलायत जानेवाले शिष्टमण्डलका चुनाव हुआ । उसमें क्या-क्या मुसीबतें आईं, उसे 'इंडियन ओपिनियन' के पाठक जानते हैं। श्री अब्दुल गनी, श्री अली और श्री गांधी, तीन व्यक्ति जायें, यह लोगोंने पहलेसे ही तय कर दिया था। लेकिन आखिर श्री अब्दुल गनी तैयार नहीं हुए, और श्री अली तथा श्री गांधीको ही जाना पड़ा । प्रारम्भ में ही विघ्न ऊपर कहे अनुसार शिष्टमण्डलमें दो व्यक्ति जायें, ऐसा स्पष्ट निर्णय २८ सितम्बर शुक्र- वारको हुआ । 'आमडेल कासिल' से चलनेका निश्चय हुआ और शनिवार, २९ सितम्बरको जहाजके टिकट खरीदे गये। सोमवार, अक्तूबर १ को केप मेलसे जाना था। उसका टिकट भी ले लिया गया। लेकिन एक घंटे बाद स्टेशन मास्टरने कहलाया कि इस मेलसे शिष्टमण्डल नहीं जा सकता; रातको ९ बजे गाड़ी जाती है, उससे जा सकता है। इसका अर्थ यह हुआ कि यदि केप मेलसे जाना टल गया, तो 'आमडेल कासिल' से नहीं जा सकते और शिष्टमण्डलको एक सप्ताहकी देरी हो जायेगी। श्री गांधीने तत्काल इसकी सूचना टेलीफोनसे महाप्रबन्धकको दी और यह बताया कि जाना कितना जरूरी है। महाप्रबन्धक स्टेशन मास्टरकी रोकका मतलब समझ नहीं पाये, इसलिये उन्होंने कहा कि मैं पता लगाकर टेलीफोन करूँगा । एक घंटे बाद सूचना मिली कि स्टेशन मास्टरने गलती की है और शिष्टमण्डल केप मेलसे जाये तो कोई हर्ज नहीं है । Gandhi Heritage Portal