सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/५२९

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

तारीखवार जीवन-वृत्तान्त (१९०५ - १९०६) १९०५ जुलाई १ : परवानों और विशेष वस्तियोंसे सम्बन्धित तथा अनधिकृत देहाती जमीनों और रिहायशी मकानोंपर लगाये गये करके बारेमें नेटालके नये मन्त्रिमण्डलके विधेयकोंकी गांधीजीने आलोचना की । ब्रिटिश भारतीय संघने उच्चायुक्तसे आवेदन किया कि लेफ्टिनेंट गवर्नर ऑरेंज खिर उप- निवेश में नगरपालिकाके रंगभेद करनेवाले कानूनोंका निषेध कर दें । जुलाई ८ : ' इंडियन ओपिनियन' में गांधीजीने माँग की कि भारतमें नमक कर रद कर दिया जाये । जुलाई १३ : ब्रिटिश भारतीय संघने अध्यादेशकी तीसरी उपधाराका, जिसके द्वारा एशियाई बाजारोंका नियन्त्रण नगर परिषदोंको दे दिया गया था, विरोध किया । जुलाई १४ : गांधीजीने जोहानिसबर्गकी नगर परिषदसे यह आश्वासन माँगा कि भारतीयोंको ट्रामगाड़ियों में यात्रा करनेकी सुविधाएँ दी जायें। जुलाई १५ : 'इंडियन ओपिनियन' में केप प्रवासी अधिनियम की आलोचना की । जुलाई १७ के बाद : 'डेली एक्सप्रेस' को अपना मतभेद प्रकट करते हुए पत्र लिखा कि उसके एक संवाददाताने बोअर युद्धके पूर्व पीटर्सबर्ग में रहनेवाले भारतीय व्यापारियों और फुटकर दुकानदारोंकी जो संख्या बताई है, वह गलत है । जुलाई २० : भारतमें बंग-भंग घोषित । जुलाई २२ : गांधीजीने दक्षिण आफ्रिकी राजनीतिज्ञोंसे साम्राज्यकी संरक्षामें भारतीयों के योगदानको दृष्टि में रखते हुए ब्रिटिश भारतीयों के साथ किये जानेवाले व्यवहारपर पुनर्विचार करनेका अनुरोध किया । अगस्त ५ : एडविन आर्नोल्ड स्मारक कोषमें १० शिलिंग चन्दा दिया । अगस्त ९ : नेटाल विधान परिषदने व्यक्ति कर विधेयक पास किया। अगस्त १२ : गांधीजीने 'इंडियन ओपिनियन' में लॉर्ड सेल्बोर्नकी इस घोषणाकी सराहना की कि वतनियोंके साथ होनेवाला प्रशासनिक अन्याय एक कलंक है । नेटाल विधानमण्डल द्वारा बस्तियों तथा भूमि-कर सम्बन्धी विधेयकोंकी अस्वीकृतिका स्वागत किया और ट्रान्सवालके सर्वोच्च न्यायालयके इस फैसलेपर हर्ष प्रकट किया कि धार्मिक जायदादको वतनियोंके नाम चढ़ाया जा सकेगा । अगस्त १४ : गांधीजीने हाजी हबीबको पत्र लिखकर इस बातसे इनकार किया कि उनके धार्मिक व्याख्यानोंमें कटु आलोचना अथवा किसीको दुःख पहुँचानेका कोई इरादा था । अगस्त १९ : बंग-भंगके सम्मिलित विरोध और ब्रिटिश मालके बहिष्कारका आह्वान किया । अगस्त २६ : ब्रिटिश विज्ञान प्रगति संघकी प्रशंसा की और आशा प्रकट की कि संघकी बैठक कभी- न-कभी भारतमें भी होगी। कर्ज़नकी वाइसरायगिरीके कालपर विचार प्रकट किये। अगस्त ३० : ब्रिटिश भारतीय संघने ऑरेंज रिवर उपनिवेशमें रंगदार व्यक्तियोंपर लागू होनेवाले नगरपालिकाके वस्ती-सम्बन्धी कुछ उपनियमोंको भारतीयोंपर भी लागू करनेपर आपत्ति की । Gandhi Heritage Portal