४९२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय सितम्बर १ : संघने उस नियमपर आपत्ति की जिसके अनुसार भारतीय शरणार्थियोंको अपने जाननेवाले यूरोपीयोंके नाम देने पड़ते थे । सितम्बर २ : गांधीजीने मिकाडोके शिक्षा-सम्बन्धी आदेशों और सैनिकोंके सदाचारको जापानके अभ्युदयका कारण बताया । सितम्बर ५ : नेटालके भारतीयोंने सरकारके इस प्रस्तावका विरोध किया कि भारतीयोंकी पाठशालाको रंगदार बच्चोंकी शिक्षण-संस्थाके रूपमें बदल दिया जाये और शिक्षामें बालकों तथा बालिकाओंके बीच कोई भेद न किया जाये । पोर्टस्मथमें रूस-जापान सन्धिपत्रपर हस्ताक्षर किये गये । सितम्बर ९ : गांधीजी ने 'इंडियन ओपिनियन' में चीनी खनिकोंके प्रति होनेवाले दुर्व्यवहारकी निन्दा की । सितम्बर १६ : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित नामोंमें गोखलेका नाम सबसे उपयुक्त माना । सितम्बर ३० : रंगदार लोगोंके अधिकारोंपर अतिक्रमण करनेवाले विवादग्रस्त कानूनोंको अध्यादेश द्वारा लागू करनेपर ट्रान्सवालकी आलोचना की । अक्तूबर ७ : दक्षिण आफ्रिकाके भारतीयोंसे अनुरोध किया कि वे शिक्षाके लिए उपयुक्त व्यवस्था करें । श्री भावनगरीकी मध्यम मार्गीय सम्मतिके प्रति असहिष्णुताकी निन्दा की और यह मत प्रकट किया कि भारतको पूर्ण न्यायकी प्राप्ति केवल शान्तियुक्त तर्कसे ही हो सकेगी । व्यापारिक परवानेके लिए की गई दादा उस्मानको अपील डर्बनके परवाना निकाय द्वारा खारिज । अक्तूबर ९ : पाँचेफस्ट्रम भारतीय संघने लॉर्ड सेल्बोर्नकी सेवामें मानपत्र तथा वक्तव्य प्रस्तुत किये। I अक्तूबर १४ : गांधीजीने पाँचेफस्ट्रममें लॉर्ड सेल्बोर्नसे मिलनेवाले शिष्टमण्डलका नेतृत्व किया 1 दक्षिण आफ्रिकाके भारतीयोंको प्लेगके प्रकोपके विषय में चेतावनी दी । भारतमें नमक- कर रद कर देनेके तथाकथित प्रस्तावका स्वागत किया । प्रोफेसर परमानन्दका स्वागत और आतिथ्य किया । अक्तूबर २८ : जोहानिसबर्गके स्वागत समारोहमें श्रोताओंसे प्रोफेसर परमानन्दका परिचय कराया और अध्यक्ष के भाषणका अनुवाद सुनाया । प्रस्ताव किया कि नेटाल कांग्रेस भारतीय व्यापारियों के मामलोंकी जाँचके लिए एक परवाना समिति नियुक्त करे । बंगालमें स्वदेशी आन्दोलनकी प्रगतिपर हर्ष प्रकट किया। आस्ट्रेलियामें जापानी यात्रियोंको आनेकी अनुमति दी जानेपर हर्ष प्रकट किया। नवम्बर १ : बंगभंगके विरुद्ध आन्दोलनको शक्तिशाली बनानेके लिए बंगाल में साम्प्रदायिक एकताकी पुकार की । नवम्बर ११ : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेसकी ओरसे इंग्लैंड जानेवाले गोखले-लाजपत शिष्टमण्डलके बारेमें लिखा और उपनिवेशके राजनीतिज्ञोंसे अपील की कि चूँकि भारत साम्राज्यका एक अभिन्न अंग है, इसलिए उसके सम्बन्ध में हर प्रकारके लिहाजसे काम लिया जाये । जहाज द्वारा दक्षिण आफ्रिका जानेवाले भारतीय यात्रियोंकी कठिनाइयोंकी ओर ध्यान दिलाया । नवम्बर १३ : एशियाई राष्ट्रीय सम्मेलनके शिष्टमण्डलने ट्रान्सवालके लेफ्टिनेंट गवर्नरसे भेंट करके यह मांग की कि उपनिवेशमें प्रवेशके लिए दिये गये प्रार्थनापत्रोंपर नियन्त्रण- निकाय विचार करे । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/५३०
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