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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/५३२

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४९४ सम्पूर्ण गांधी वाङमय फरवरी १६ : भारतीयों द्वारा जोहानिसबर्ग की ट्रामगाड़ियोंके उपयोगके प्रश्नपर संघ 'ट्रान्सवाल लीडर' के साथ वाद-विवादमें शामिल हुआ । फरवरी २२ : दादाभाई नौरोजीको भेजे वक्तव्य में गांधीजीने ट्रान्सवाल तथा ऑरेंज रिवर उपनिवेशमें उत्तरदायी सरकार के अधीन भारतीय हितोंकी रक्षाकी आवश्यकतापर जोर दिया । फरवरी २६ : दादाभाई नौरोजीको सुझाया कि दक्षिण आफ्रिकाके भारतीयोंकी ओरसे एक शिष्टमण्डल ब्रिटिश मन्त्रियोंसे मिले । फरवरी २८ : नेटाल भारतीय कांग्रेसकी ओरसे निवर्तमान अध्यक्ष अब्दुल कादिरको मानपत्र दिये जानेके अवसरपर भाषण दिया । इस महीने में जूलू विद्रोह भड़क उठा । मार्च ७ : जोहानिसबर्ग में ट्रामके परीक्षणात्मक मुकदमेकी वकालत की । मार्च १० के पूर्व : नेटाल भारतीय कांग्रेसने उपनिवेश-सचिवको प्रवासी प्रतिबन्धक अधिनियमके अन्तर्गत पासों और प्रमाणपत्रोंपर प्रतिषेधात्मक शुल्क लगानेके विरोध में पत्र लिखा । मार्च १० : गांधीजीने “एशियाइयोंकी निरन्तर बाढ़ " पर दक्षिण आफ्रिकाकी सहयोगी व्यापारसंघ कांग्रेसके प्रस्तावकी आलोचना की । ट्रान्सवालकी अनुमतिपत्र सम्बन्धी शिकायतोंके सम्बन्ध में शिष्टमण्डलके साथ सहायक उपनिवेश- सचिवसे भेंट की । मार्च ११ : प्रिटोरियाकी सभामें भाषण दिया । मार्च १२ : ट्रामके परीक्षात्मक मुकदमे में वकालत की और जीते । मार्च १६ : १९०२ के केप प्रवासी प्रतिबन्धक अधिनियमके संशोधनार्थं सरकारी विधेयक प्रकाशित । गज़ट " में मार्च १७ : गांधीजीने जूलू-विद्रोह के अवसरपर भारतीयोंसे अनुरोध किया कि वे सरकारको अपनी सेवाएँ अर्पित करें। मार्च १९ : एक पत्र में ट्रांसवालके शान्ति-रक्षा अध्यादेश तथा १८८५ के कानून ३ के अन्तर्गत होनेवाली कठिनाइयों की ओर दादाभाई नौरोजीका ध्यान आकर्षित किया। मार्च २१ : जोहानिसबर्ग में रंगदार लोगों की सभा में भाषण दिया । मार्च २४ : साम्राज्यीय सरकारको रंगदार लोगों द्वारा मताधिकार तथा अन्य अधिकारोंके निमित्त भेजे गये प्रार्थनापत्रका अनुमोदन किया । मार्च ३० : केपके रंगदार लोगोंकी कठिनाइयोंके सम्बन्ध में. डॉ० अब्दुर्रहमानने लॉर्ड सेल्बोर्नसे मुलाकात की। दादा उस्मानने अपने व्यापारिक परवानेकी अस्वीकृतिके विरुद्ध उपनिवेश-मन्त्रीसे अपील की। मार्च ३१ से पूर्व : साम्राज्यीय सरकार द्वारा ट्रान्सवाल-संविधानके सम्बन्ध में आयोगकी नियुक्ति । मार्च ३१ : गांधीजीने ट्रान्सवालकी खानोंमें काम करनेके लिए भारतीय मजदूरोंके आयातकी निन्दा की । अप्रैल ७ के पूर्व : ब्रिटिश भारतीय शिष्टमण्डलने भारतीयोंकी शिकायतोंके सम्बन्धमें जोहानिसबर्गके रेलवे अधिकारियोंसे भेंट की । ट्रान्सवालमें भारतीयोंके प्रवेशपर लगे प्रतिबन्धोंसे उत्पन्न कठिनाइयोंके विषयमें गांधीजीने 'लीडर' को पत्र लिखा । अप्रैल १२ : ट्रान्सवालमें भारतीयोंकी गिरती हुई दशाके विषयमें विलियम वेडरबर्नको पत्र भेजा । Gandhi Heritage Portal