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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/५३५

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तारीखवार जीवन-वृत्तान्त ४९७ गांधीजीने डर्बनमें कांग्रेस द्वारा आयोजित स्वागत समारोह में भाषण दिया और आशा व्यक्त की कि दलको स्थायीरूप दिया जाये । गांधीजीने सुझाव दिया कि भारतीयोंको स्थायी आहत सहायक दलमें भरती होनेकी अनुमति दी जाये । जुलाई २३ : कांग्रेसने दलके सदस्योंको पदक देनेका निश्चय किया । गांधीजीने हीरक जयन्ती पुस्तकालयकी सभा में भाषण दिया । जुलाई ३० : गांधीजीने शिष्टमण्डलकी उपयोगितापर वेडरबर्नकी सम्मति ली । अगस्त ४ : ट्रान्सवाल वापस लौटनेके इच्छुक भारतीय शरणार्थियोंकी कठिनाइयां बताई। लिटिलटन और एलगिनके संविधानोंका फर्क बताते हुए लेख लिखा । उपनिवेश सचिव ने विधान परिषदको सूचित किया कि सरकारका इरादा है कि ट्रान्सवालमें एशियाइयोंके पुनः पंजीयनके लिए विधेयक पेश किया जाये। ब्रिटिश भारतीय संघने इसपर तत्काल कार्रवाई करनेका प्रस्ताव किया । अगस्त ६ : गांधीजीने प्रस्तावित पुनः पंजीयनसे ट्रान्सवालके भारतीयोंको होनेवाली कठिनाइयोंके विषयमें दादाभाई नौरोजीको लिखा और सुझाया कि वे उपनिवेश मन्त्री व भारत-मन्त्रीसे भेंट करें। अगस्त ७ : नेटालके गवर्नर सर हेनरी मैककैलमने डोलीवाहक दलकी सेवाओंके लिए गांधीजीको धन्यवाद दिया । अगस्त ९ के पूर्व : गांधीजीने 'रैंड डेली मेल' के नाम एक पत्र में भारतीयोंके लिए पूर्ण नागरिक स्वतंत्रता की मांग की अगस्त ११ : 'इंडियन ओपिनियन' में पुनः पंजीयन अध्यादेशके सम्बन्ध में उपनिवेश सचिव के वक्तव्यका विश्लेषण किया । अगस्त १२ : हमीदिया इस्लामिया अंजुमनमें राजनीतिक स्थितिपर व्याख्यान देते हुए भारतीयोंको प्रेरित किया कि वे अध्यादेशके सम्बन्धमें उपनिवेश मन्त्रीके वक्तव्यका विरोध करनेके लिए संगठित हो जायें । अगस्त १३ : दादाभाई नौरोजीको पत्र लिखा, जिसमें साम्राज्यीय सरकार द्वारा ट्रान्सवालके लिए न्याय भावनापर आधारित कानून बनानेकी आवश्यकता बताई । नेटाल भारतीय कांग्रेसने लॉर्ड एलगिनको नगर निगम संघटन विधेयकके सम्बन्धमें प्रार्थनापत्र भेजा । अगस्त १८ : गांधीजीने इस पक्ष में विचार व्यक्त किये कि एक राष्ट्रके निर्माणके लिए भारत में हिन्दुस्तानीको राष्ट्रभाषा स्वीकार किया जाये । सूचित किया कि मलायी बस्ती समितिने नगर परिषद द्वारा अपनी अर्जीकी अस्वीकृति के खिलाफ अपील करनेका निर्णय किया है। अगस्त २१ : केप परवाना कानून 'गजट' में प्रकाशित कर दिया गया । अगस्त २२ : एशियाई कानून संशोधन अध्यादेशका मसविदा ट्रान्सवाल सरकारके 'गजट' में प्रकाशित हुआ । अगस्त २५ : आइन्दा ब्रिटिश भारतीयोंको रंगदार लोगोंकी श्रेणीमें न रखनेकी माँग की। ब्रिटिश भारतीय संघने उपनिवेश-सचिवको एक पत्र लिखकर अध्यादेश के प्रति अपना विरोध प्रकट किया। ३२ Gandhi. Heritage Portal