४९८ सम्पूर्ण गांधी वाङमय अगस्त २८ : अध्यादेशके अन्तर्गत पुनः पंजीयनके सम्बन्ध में 'इंडिया' को तार भेजा; जाँच- आयोगकी नियुक्तिका सुझाव दिया । सितम्बर १ : उपनिवेश सचिवसे मिलने प्रिटोरिया जानेवाले शिष्टमण्डलका नेतृत्व किया । सितम्बर ४ : ट्रान्सवाल विधान सभा में अध्यादेश पेश किया गया । सितम्बर ८ : गांधीजीने एशियाई अध्यादेशके मसविदेको पास करानेके सरकारी आग्रहको मानव जातिके प्रति अपराव बताया । ब्रिटिश भारतीय संघने भारत-मन्त्री, उपनिवेश-मन्त्री तथा भारतके वाइसरायको प्रस्तावित अध्यादेशके विरोध में तार भेजे । सितम्बर ९ के पूर्व : एक सभामें गांधीजीने "खूनी कानून" को भारतीयोंको उपनिदेशसे खदेड़नेका पहला कदम बतलाया और भारतीयोंसे उसका विरोध करने के लिए कहा । सितम्बर ९ : हमीदिया इस्लामिया अंजुमनकी सभा में गांधीजीने ट्रान्सवालकी राजनीतिक स्थितिपर व्याख्यान दिया और इंग्लैंडको शिष्टमण्डल भेजने की आवश्यकतापर जोर दिया; लोगोंको परामर्श दिया कि वे पंजीयन न करायें और सबसे पहले स्वयं जेल जानेका इरादा प्रकट किया। सितम्बर ११ : जोहानिसबर्ग में आयोजित ब्रिटिश भारतीयोंकी सार्वजनिक सभा में अध्यादेशको वापिस लेनेकी माँग की और चेतावनी दी कि यदि यह अध्यादेश कानून बना दिया गया तो भारतीय उसका विरोध करेंगे। सितम्बर १२ : ब्रिटिश भारतीय संघने ट्रान्सवालके लेफ्टिनेंट गवर्नरको सार्वजनिक सभामें पास किये गये प्रस्ताव भेजे । गांधीजीने अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए 'रैंड डेली मेल' को लिखा । सितम्बर १४ के पूर्व : ब्रिटिश भारतीय संघने 'स्टार' को लिखा कि भारतीय असहनीय परिस्थितियोंके सामने न झुकनेको कृतसंकल्प हैं । सितम्बर १४ : भारतीय स्त्री पूनियाको रेलगाड़ीसे यात्रा करते समय पृथक् अनुमतिपत्र न रखनेके अपराधमें फोक्सरस्ट में गिरफ्तार करके रोक लिया गया । सितम्बर १५ : पूनियापर मुकदमा चलाया गया और उसे उपनिवेश छोड़नेकी आज्ञा दी गई। वह जर्मिस्टनमें उस आज्ञाकी अवहेलनाके अपराध में पुनः गिरफ्तार कर ली गई । सितम्बर १८ : उच्चायुक्तने ब्रिटिश भारतीय संघको सूचित किया कि अध्यादेशको अभीतक औपचारिक स्वीकृति नहीं मिली है । सितम्बर १९ : अखबारोंको पूनियाके मुक़दमेके बारेमें पत्र लिखा जिसमें भारतीय स्त्रियों और बच्चोंके प्रति आतंकका राज्य कायम करने के लिए ट्रान्सवाल सरकारकी आलोचना की । सितम्बर २० : ट्रान्सवालमें भारतीयोंकी अवैध बाढ़की जाँचके लिए अदालती जाँच समिति बैठानेकी बात को तुरन्त मान लेनेकी अपनी रजामंदी घोषित की। सितम्बर २१ : गांधीजीने 'लीडर' के इस वक्तव्यको कि भारतीय दुश्चरित्र स्त्रियोंको अपनी पत्नियाँ कहकर उपनिवेशमें ला रहे हैं चुनौती देते हुए पत्र लिखा । नेटाल मर्क्युरी ने पूनियाके मामलेका सरकारी स्पष्टीकरण प्रकाशित किया । भारतीयोंकी एक सभामें अन्ततः यह निश्चय किया गया कि गांधीजी तथा अलीको शिष्ट मण्डलके रूपमें इंग्लैंड भेजा जाये । लॉर्ड सेल्बोर्नने ब्रिटिश भारतीय संघको सूचित किया कि शिष्टमण्डलके इंग्लैंड पहुँचने तक अध्यादेशको स्वीकृति नहीं दी जायेगी । Gandhi Heritage Portal
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 5.pdf/५३६
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