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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 9.pdf/११४

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४२. तार : द० आ० ब्रि० भा० समितिको ' डर्बन अक्तूबर २, १९०८ दक्षिण आफ्रिका ब्रिटिश भारतीय समिति लन्दन । कांग्रेस स्तब्ध | कोमाटीपूर्टमें ८० से अधिक गिरफ्तार । नाबालिग बच्चों सहित बम्बई से आये ट्रान्सवाल प्रमाणपत्र-धारी तेरह भारतीयोंको ट्रान्सवालके निकासी पास (ट्रांजिट पास) देने से इनकार । कारण, वे नया कानून न मानेंगे । ट्रान्सवाल अधिकारी उन्हें धमका रहा है। नेटाल अधिकारी उसको सहायता कर रहे हैं। कानूनी सलाहकारको उनसे मिलनेकी अनुमति नहीं दी गई। कांग्रेस इसे नाजायज दबाव मानती है। नतीजा होगा लोग ट्रान्सवालकी अदालतों में अधिकारके लिए लड़नेके अवसरसे वंचित हो जायेंगे । नेटाल भारतीय कांग्रेस गांधीजीके स्वाक्षरोंमें अंग्रेजी मसविदेकी फोटो नकल ( एस० एन० ४९१३); और कलोनियल ऑफिस रेकर्ड्स : २९१/१३२ से । १. दक्षिण आफ्रिका ब्रिटिश भारतीय समिति ( साउथ आफ्रिका ब्रिटिश इंडियन असोसिएशन) को भेने इस तारका गांधीजीके स्वाक्षरोंमें लिखित मूल अंग्रेजी मसविदा कटा-फटा है और उसका केवल पहला पृष्ठ उपलब्ध है । इस पृष्ठके अन्तिम शब्द हैं " लीगल ऐडवाइज़र " ( कानूनी सलाहकार ) । किन्तु पूरा तार फलोनियल ऑफिस रेफईसमें उपलब्ध है । इस तारकी एक प्रति श्री एल० डब्ल्यू० रिचने ३ अक्तूबरको उपनिवेश-उपमन्त्रीको भेज दी थी । २. डर्बनके एक प्रसिद्ध वकील रोमर रॉबिन्सनने २ अक्तूबर, १९०८ के अपने पत्रमें भारतीय प्रवासी-प्रतिबन्धक अधिकारी (इंडियन इमिग्रेशन रिस्ट्रिक्शन ऑफिसर) को लिखा था : "मुझे यह भी बताया गया गया है कि इन भारतीयोंकि कानूनी सलाहकारकी हैसियतसे मुझे उनसे मिलनेकी अनुमति देनेसे इनकार कर दिया गया है; और इस प्रकार उन्हें वह सुविधा तक नहीं दी गई है, जो जेलमें अपराधीको भी प्राप्त होती है । क्या बात वास्तवमें ऐसी है ? यदि नहीं तो कृपया मुझे उनसे मिलनेकी लिखित अनुमति प्रदान करें । " Gandhi Heritage Porta