सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 9.pdf/१५१

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ अभी शोधित नहीं है।

4009 4004 कसा भारी संघर्ष ११७ रहे हैं, उस मुल्क में आबाद भारतीयोंको धीरे-धीरे निकाल देना चाहिए। इसलिए ट्रान्सवालके भारतीयोंको समस्त भारतके भारतीयोंका भार उठाना है। इसको उठाना सहज काम है और ट्रान्सवालके भारतीय इसे उठायेंगे, यह हम बादमें बतायेंगे | कर्नल सीलीके विचार ब्रिटिश नीति में परिवर्तनके सूचक हैं । इनसे ब्रिटिश राजनीति कलंकित होगी और यदि ये विचार बहुत फैलेंगे और उनको व्यवहारमें लाया जायेगा तो ये ब्रिटिश साम्राज्यकी अवनतिके लक्षण हैं । इसलिए भारतीय जो टक्कर ले रहे हैं, उसमें ब्रिटिश साम्राज्यका हित भी आ जाता है । जो ब्रिटिश साम्राज्यका नाश हुआ देखना चाहते हैं वे ही कर्नल सीलीके विचारका समर्थन करेंगे। सब उपनिवेश ऐसे ही हैं। इसलिए वे ब्रिटिश साम्राज्यके शत्रु हैं। भारतीय सत्याग्रही इसी विचारके विरुद्ध लड़ते हैं और लड़ेंगे, इसलिए वे ब्रिटिश साम्राज्यके मित्र माने जा सकते हैं। -- बल इस तरह विचार करनेपर हमारे पाठक सहज ही समझ सकते हैं कि ट्रान्सवालका संघर्ष तुच्छ अनुमतिपत्रों (परमिट) के लिए नहीं है, थोड़े-से भारतीय आ सकें, इसके लिए नहीं है, बल्कि यह तो महान लड़ाई है । यह लड़ाई शाही है । भारतीयोंने बलीसे टक्कर ली है, फिर भी हम कह सकते हैं कि हमारी जीत हो सकती है। किसीको यह न सोचना चाहिए कि यह तो ऐसी ही बात है जैसे चींटा राबको मटको उठाये। ऐसा कहनेवाला सत्याग्रहका सत्यका नहीं समझ सकता । जो काम करोड़ोंसे नहीं हो सकता उसे मुट्ठी भर लोग कर सकते हैं, ऐसे उदाहरण हम हमेशा आँखोंसे देखते रहते हैं। ऐसी ही बात ट्रान्सवालके भारतीयोंकी है। वहाँ भारतीय थोड़े हैं, इसीलिए ठीक तरह संघर्ष कर सकते हैं । बहुत-से भारतीयोंको समझाने, उनको सत्याग्रहको विशेषता एकाएक बताने और उनका विरोध मिटाने में समय लग सकता है । किन्तु यदि थोड़े ही से लोगोंमें सत्यका बीज पड़कर फूट निकले तो बादमें उस पौदेकी डालियोंको दूसरे स्थानोंमें रोपकर उनसे अगणित पौदे पैदा किये जा सकते हैं। यह न समझना चाहिए कि राईका पहाड़ नहीं बनेगा । यह भी होता रहता है । यही खलकके खालिककी खूबी है । पर्वत रजकणोंसे ही बना है । कैसे बना है, यह सोचें तो हम पागल हो जायेंगे । किन्तु वह बना है, यह हम देख सकते हैं। जैसे हम यह मानते हैं कि थोड़े-से भारतीयोंसे ही यह काम पूरा पड़ जायेगा, वैसे ही, यह काम सरल है, हम यह भी कह चुके हैं। यह सरल हैं, अब हम यह कहने के कारणपर विचार करें। सत्याग्रहकी लड़ाई जैसे-जैसे जमती जाती है वैसे-वैसे हम देखते जाते हैं कि यह लड़ाई ऐसी है जिसे गरीब भी लड़ सकते हैं। पैसेवाले पैसेका बोझा उठाते-उठाते थक जाते हैं, इसलिए उनसे सत्यका बोझा उठाया नहीं जाता। इसलिए ट्रान्स- वालके भारतीयोंको गरीबी इख्तियार करनी है। यह कैसे हो सकता है, यह सोचें तो हार बैठेंगे। इसमें क्या है ? पैसा आज है, कल नहीं है। वह तो चोरी भी चला जाता है, इसलिए उसे हम ही छोड़ देंगे और उसके बदले सत्यकी तलवार हाथमें ले लेंगे । इस तरह सोचनेकी शक्ति और उसके अनुसार चलनेकी शक्ति कदाचित् ही मिलती है । फिर, हम कह चुके हैं कि लड़ाई चालू रहेगी ही । क्यों न चालू रहेगी ? कौममें कुल मिलाकर एकता दिखाई देती है। सैकड़ों भारतीय जेल में डुबकी लगाकर पवित्र हो चुके हैं। उन्होंने जेल जीवनकी सुन्दरता देखी है, इसलिए उनका पीछे हटना सम्भव नहीं है। और ट्रान्सवालके बहुत-से भारतीय गरीब ही हैं, इसलिए उनके पीछे हटनेको बात रहती ही नहीं। ऐसे भारतीयोंके सम्मुख हम कर्नल सीलीके भाषणको रखते हैं और उनसे प्रार्थना करते हैं कि आप इस भारी Gandhi Heritag Heriacortal 1-118-93