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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 9.pdf/१७३

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फीनिक्सकी पाठशाला १३९ चन्दा करके भिजवायें। जो लोग इसके लिए रुपया देंगे वे सार्वजनिक कामके लिए रुपया दे रहे हैं, ऐसा समझना चाहिए। फोनिक्सवासी इस समय काममें इतने गुंथे हुए हैं कि उनसे चन्दा इकट्ठा करनेका प्रयास नहीं हो सकता । पोशाक बच्चोंकी पोशाक हमेशा एक-सी रखने में बहुत सुविधा रहती है। हमारे खयालसे नीचे लिखे अनुसार कपड़ोंकी जरूरत है : १ बालोंका ब्रश ३ आधे पायजामे ३ कुर्ते ४ चड्डियाँ २ जोड़ी चप्पलें या जूते १ धूपकी टोपी २ रातकी पोशाकें २ तौलिये २ हाथ पोंछनेके अँगोछे ४ रूमाल शि० पें० १-६ ६-० ६-० I ० ६-० २-० 1 a २-० १-० १ - ० पौंड १-१३-६ हर बच्चा टोपी वही पहने जो उसकी जातिमें प्रचलित हो । ऊपर जिस धूप-टोपीका जिक्र किया है वह केवल धूप में काम करते वक्त पहनने की है । यह पोशाक पहनानी है या नहीं, यह माँ-बापकी मर्जीपर है। यदि उनका विचार इतना खर्च न करनेका अथवा बच्चोंको इतनी सादगी न सिखानेका हो तो वे ऊपर बताई गई पोशाकका ध्यान रखकर बच्चोंके साथ एक छोटी पेटी या बण्डल में सामान भेज दें। हमारी सलाह तो यह है कि वे बच्चोंके साथ कुछ न भेजें और हमें १ पौंड १३ शिलिंग ६ पेंस भेज दें तथा ऊपर कहे अनुसार पोशाक बनवाने और पहनानेकी इजाजत दे दें। ऊपर कही गई पोशाक एक बरसके लिए है । सोनेकी व्यवस्था हमारा इरादा सोनेके लिए चारपाइयाँ देनेका नहीं है; बल्कि जैसे तख्त जेलोंमें इस्तेमाल किये जाते हैं वैसे तख्तोंकी व्यवस्था करनेका है। ऐसा लगता है कि यह तन्दुरुस्तीके' लिए ज्यादा अच्छा होगा । हम बच्चोंको गद्दे देनेके बजाय कम्बलोंके ऊपर सुलाना अधिक आरोग्यप्रद मानते हैं । किन्तु इस सम्बन्धमें माँ-बापोंकी मर्जीके मुताबिक फेरफार कर देंगे । हमारे विचारसे बच्चोंको नीचे लिखे अनुसार वस्तुओंकी जरूरत होगी : ३ कम्बल १ तकिया ४ चादरें २ तकियेके गिलाफ शि० पें० १०-० १-० ४-० १-० १६-०