- पत्र: 'इंडियन ओपिनियन' को १५३ इसलिए हम पठान, जिन्होंने स्वर्गीया महारानी विक्टोरियाका और वर्तमान सम्राट् और सम्राज्ञीका ख़ुदा उनको सलामत रखे -नमक खाया है, गांधी और पोलकके इन स्वयं- सेवकोंको धमकी देनेवाला कहते हैं । हम सरकारसे निवेदन करते हैं कि वह हमारे इस काममें विरुद्ध पक्ष न ले। गांधी हमेशा हमारे धर्मकी तौहीन करते हैं और हमारे पैगम्बरका अपमान करते हैं; इतना ही नहीं, वे हमेशा देशके अमन-चैनमें खलल डालते रहते हैं । यदि सरकार उनको और उनकी स्वयंसेवकोंकी टुकड़ीको उपनिवेश से बाहर न निकाल सकती हो तो हम सरकारकी खातिर यह काम जल्दी कर सकेंगे । आप यह पत्र प्रकाशित कर देंगे तो हम आपके आभारी होंगे । मैंने कहा है कि इस पत्रपर पठानोंके दस्तखत हैं; किन्तु मैं यह नहीं कह सकता कि यह उनका लिखा हुआ है । एक दिन वह था जब पठानोंने सरकारको दर्खास्त देकर कहा था कि " आपके कानूनको हम मानें, इससे तो यही अच्छा है कि आप हमें तोपके गोलेसे उड़ा दें । " आज पठान उसी कानूनको मान लेंगे अथवा दूसरोंसे उसके मनवाने में मदद करेंगे, यह सम्भव नहीं दिखता। यदि यह सम्भव हो जाये तो यह उनके लिए और हमारे लिए लज्जाकी बात होगी । तब यह पत्र कैसे लिखा गया ? मुझे विश्वास है कि इसके पीछे एक प्रसिद्ध भारतीयका हाथ है। कुछ गोरे भी अपनी स्वार्थसिद्धिके लिए भारतीय समाजके विरुद्ध प्रपंच रच रहे हैं । बहुत-से भारतीय खुद जले हुए हैं, और इसलिए वे दूसरोंको जलाने के इरादेसे सारी कौमको डुबाना चाहते हैं । ये दोनों तरहके लोग अपने इस खेलमें पठानोंका उपयोग करना चाहते हैं । पठान खुद लिखना पढ़ना जानते नहीं, इसलिए सरलता से बहकावे में आकर दस्तखत कर देते हैं । उनको ऐसा करने से पहले विचार करना चाहिए। मैं आशा करता हूँ कि कोई भारतीय उन्हें [ पठानोंको ] शुद्ध बुद्धिसे यह पत्र पढ़ा देगा। यदि वे चाहे जिस कागजपर विचार किये बिना दस्तखत करेंगे तो उनकी तलवारको बट्टा लगेगा । तलवारका प्रयोग जब बुरे प्रयोजनके लिए होता है तब उसको मैं तो लोहेके जंग खाये टुकड़ेके समान मानता हूँ । जिस व्यक्तिने यह पत्र लिखा है या लिखाया है उसने धरनेदारोंको धमकी दी है। किन्तु पठानोंको समझ लेना चाहिए कि उनका हाथ किसी भारतीयपर न उठेगा । उसमें जो कुछ मेरे विरुद्ध लिखा गया है, उसके सम्बन्धमें मुझे ज्यादा कहना नहीं है । लेखक हिन्दुओं और मुसलमानोंमें लड़ाई कराना चाहता है । मैं मुसलमानोंके पैगम्बरोंका अपमान करता हूँ, यह आरोप लगाना बिल्कुल अज्ञानकी बात है । मुझे तो ऐसा खयाल सपने में भी नहीं आता । सच्चा हिन्दू-धर्मं दूसरेके धर्मका अपमान करने में है ही नहीं। मैं मानता हूँ कि में उसी धर्मका पालन करनेवाला हूँ। मेरा जीवन हिन्दुओं और मुसलमानों में एकता कैसे हो, यह खोजने में ही लगा हुआ है। तो फिर मुझसे मुसलमानोंके पैगम्बरोंका अपमान कैसे हो सकता है ? किन्तु जो कौमके दुश्मन हैं वे झगड़ा करानेके लिए चाहे जैसी बातें करके संगठन तोड़ना चाहते हैं; और उनका इरादा उसमें पठानोंको घसीटनेका है । ऐसे समय में समाजके जो लोग समझदार और जातीय हितके आकांक्षी हैं उन्हें सावधान रहना चाहिए। पहली बात तो यही है कि उन्हें हर व्यक्तिकी धमकी से डरना नहीं है । भारतीय समाज सरकार से सत्याग्रह के द्वारा लड़ता है । वैसे ही वह उन भारतीयोंसे भी लड़ेगा जो भारतीय समाजके शत्रु होंगे। डर एक खुदाका ईश्वरका रखना है। जो समाजका
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