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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 9.pdf/१९२

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१५८ सम्पूर्ण गांधी वाङमय भारतीयोंकी सफलता उनके एकमत रहनेपर निर्भर है। इसलिए ट्रान्सवालके जिन-जिन भारतीयोंपर इसका असर होगा उन सबको सूचना भेज दी जायेगी । [ अंग्रेजीसे ] इंडियन ओपिनियन, २३-१-१९०९ ९९. काछलियाके लेनदारोंकी बैठकमें पैरवी' [ जोहानिसबर्ग जनवरी २२, १९०९] श्री गांधीने, जो काछलियाकी ओरसे बोले, कहा कि लेनदार जो भी कार्रवाई उचित समझें, करनेके लिए स्वतन्त्र हैं । व्यापारियोंने मेरे मुवक्किलमें जो विश्वास किया है उसका जवाब वे उनमें अपना विश्वास प्रकट करके देना चाहते हैं। अगर वे चाहें तो उनकी मालियतका उपयोग व्यापारको चालू रखकर ज्यादासे ज्यादा लाभके खयालसे कर सकते हैं, या उनका पूरा माल बेच सकते हैं। श्री काछलिया व्यापारको जारी नहीं रख सकते । अध्यक्षने यह कहकर बैठक समाप्त कर दी कि वे लेनदारोंके बहुमतके प्रतिनिधिकी हैसियतसे कोई फैसला करनेके लिए तैयार नहीं हैं; लेकिन वे श्री काछलियाको उनका पूरा-पूरा पावना चुकानेके लिए अगले सोमवार की दोपहर तक की मुहलत देते हैं । श्री गांधीने कहा कि उनके मुवक्किल मुहलत नहीं चाहते । " [ अंग्रेजी से ] इंडियन ओपिनियन, ३०-१-१९०९ T १. लेनदारों और अखबारोंको लिखे गये पत्रोंके मुताबिक (देखिए पृष्ठ १५४-५७ ) श्री अ० मु० काछलियाके लेनदारोंकी एक बैठक ब्रिटिश भारतीय संघके कार्यालय में हुई थी । व्यापारी-न्यास ( मर्चेंट्स ट्रस्ट ) के श्री हॉलने अध्यक्षता की। श्री काछलियाने अपना हिसाबका चिट्ठा पेश किया, जिसमें मोटे तौरपर ७,५०० पौंडकी मालियत और ३,८०० की देनदारी दिखाई गई थी । उन्होंने कहा कि वे अपने लेनदारोंको नकद भुगतान नहीं कर सकते, जबकि श्री हॉलने पूरे भुगतानकी माँग की । जनवरी २३, १९०९ के रैंड डेली मेलमें बैठकका पूरा विवरण प्रकाशित हुआ था । उसी दिन इससे पहले जोहानिसबर्ग व्यापारसंघ ( चैम्बर ऑफ कॉमर्स) की कार्यकारिणीने अपने वस्त्रादिके थोक व्यापार विभागके इन प्रस्तावोंका अनुमोदन किया था कि अगर कोई एशियाई " अपनी मालियत अपने लेनदारों के सुपुर्द करनेके खयालते उनकी कोई बैठक" बुलाये " और उसकी यह कार्रवाई अनाक्रामक प्रतिरोध आन्दोलनका ही एक हिस्सा हो तो ऐसे लेनदारोंको चाहिए कि वे सिवा उस हालतके जब देनदार एशियाईने अपनी पूरी देनदारीका भुगतान कर दिया हो, जायदाद की जन्तीके लिए अर्जी दें । " २. बाकी लेनदारोंने श्री हॉलके फैसलेका विरोध नहीं किया, और बैठक समाप्त कर दी गई ।