१००. पत्र : 'रैंड डेली मेल 'को' जोहानिसबर्ग जनवरी २२, १९०९ सेवामें सम्पादक महोदय,
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शायद आप मुझे अपने सम्पादकीय लेखकी और जिसे आप ब्रिटिश भारतीय समाजका सबसे नया कदम" कहते हैं उसपर की गई अपनी टिप्पणियोंकी थोड़ी टीका करनेकी अनुमति देंगे। आपकी टिप्पणियोंसे जो बहुत-से गौण प्रश्न उठते हैं, उनपर मैं विचार नहीं करूँगा । परन्तु मैं कहना चाहता हूँ कि जिस संघर्षको मेरे देशवासी चला रहे हैं, आप या तो उसकी भावनाको नहीं समझते या उसे समझने की परवाह नहीं करते । सबसे नये कदमका मंशा यूरोपीय व्यापारियोंको कार्रवाई करने के लिए दबाना नहीं है। आपके संवाददाताको उन्हीं प्रश्नों के उत्तर दिये गये थे जो उसने पूछे थे । इसलिए बहुत-सी बातें बतानेके लिए रह गई हैं । वह मुझसे प्रश्नकी केवल एकपक्षीय जानकारी ले गया था । - भारतीय व्यापारी यह नहीं चाहते कि उनके इस सबसे नये कदमसे एक भी यूरोपीय व्यापारीको नुकसान पहुँचे। इसके विपरीत, उन्होंने अपनी मर्जी से अपने लेनदारोंका भी नुकसान उठाना मंजूर किया है। अपने लेनदारोंको नोटिस देकर श्री काछलियाने उन्हें केवल यह सूचित किया है कि जो माल उन्हें सौंपा गया था उसको सरकारकी कार्रवाई से शायद आप इसमें यह जोड़ेंगे कि ब्रिटिश भारतीयोंकी कार्रवाईसे भी खतरा हो गया है । श्री काछलियाने अपने लेनदारोंके सामने अपना जो हिसाबका चिट्ठा पेश किया उसपर कोई भी देनदार गर्व कर सकता है; और उन्होंने अपने लेनदारोंके सामने जो बयान दिया है, उसे मैं पूरी तरह सम्मानजनक मानता हूँ। उन्होंने कागजपर ही पूरा और सही-सही हिसाब नहीं दिखाया है, बल्कि यह भी कहा है कि वे लेनदारोंको अपना माल सौंपकर ही उनसे भरपाईकी रसीद लेना नहीं चाहते, बल्कि उन्हें उस मालपर कोई घाटा हो तो वे उसे अपनी भविष्यकी कमाईसे पूरा करनेके लिए तैयार हैं, बशर्ते कि जिस देशको उन्होंने अपना लिया है उसकी सरकार उन्हें कमाई करने दे । हमारे इस सबसे नये कदमका यह अर्थ कदापि नहीं है कि ब्रिटिश भारतीय व्यापारी यों ही अपने लेनदारों की बैठक बुलायें और स्थितियोंके दबावसे उन्हें कुछ हद तक अपनी हानिमें शामिल करें। सब ब्रिटिश भारतीय केवल यूरोपीयोंके ही देनदार नहीं हैं। शायद श्री काछलियाके ५० प्रतिशत लेनदार भारतीय हैं। कुछ भी हो, ब्रिटिश भारतीय व्यापारी १. यह ३०-१-१९०९ के इंडियन ओपिनियन में "श्री गांधीका पत्र" शीर्षक छपा था । २. देखिए परिशिष्ट ९ । ३. इस भेंटकी रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है । ४. देखिए पिछला शीर्षक । Gandhi Heritage Porta