मेरा जेलका दूसरा अनुभव – [४] - १६३ मशीन चलानेका काम पहले-पहल मैंने यहीं सीखा। यह काम मुश्किल नहीं था, इसलिए सीखने में विशेष समय नहीं लगा । अधिकतर भारतीय कैदी कंकड़ी फोड़ने का काम ही करते थे । इसलिए मैंने भी उस कामको माँग की। लेकिन सन्तरीने कहा कि बड़े दारोगाका उसे ऐसा हुक्म है कि मुझे बाहर न निकाला जाये। इसलिए उसने मुझे कंकड़ी फोड़नेके लिए जानेकी अनुमति नहीं दी । एक दिन ऐसा हुआ कि मेरे पास मशीनपर अथवा बिना मशीनके सीनेका काम नहीं था । इसलिए मैंने पुस्तकें पढ़ना शुरू किया। रिवाज यह है कि हरएक कैदीको जेलका कुछ-न- कुछ काम करना ही चाहिए। इसलिए सन्तरीने मुझे बुलाकर पूछा, आज क्या तुम बीमार हो ? मैंने जवाब दिया : जी नहीं । प्र० : तो तुम कोई काम क्यों नहीं कर रहे हो ? उ० : मेरे पास जो काम था वह पूरा हो चुका है। मैं कामका ढोंग नहीं करना चाहता। मुझे काम दें तो मैं करनेके लिए तैयार हूँ । अन्यथा खाली समय में बैठा-बैठा पढ़ता रहूँ तो उसमें क्या आपत्ति है ? प्र० : यह तो ठीक है, लेकिन जिस समय बड़ा दारोगा या गवर्नर आये उस समय तुम स्टोरमें रहो तो अच्छा । उ० : में ऐसा करनेके लिए तैयार नहीं हूँ। मैं गवर्नरसे भी कहनेवाला हूँ कि स्टोरमें काफी काम नहीं है, इसलिए मुझे कंकड़ी फोड़नेके लिए भेजा जाये । प्र० : तब ठीक है । पर मैं अनुमतिके बिना तुम्हें कंकड़ी फोड़नेके लिए नहीं भेज सकता । इस घटना के कुछ ही देर बाद गवर्नर आया। मैंने उसके सामने सारी हकीकत रख दी। उसने कंकड़ी फोड़नेके लिए जानेकी अनुमति तो नहीं दी, लेकिन यह कहा कि तुम्हें वैसा करनेकी जरूरत नहीं है; क्योंकि तुम कल ही फोक्स रस्ट वापस भेजे जा रहे हो । डाक्टरी जाँच - कैदियोंका नंगा किया जाना फोक्स रस्टकी जेल छोटी थी । इसलिए कुछ सुविधाएँ जो वहाँ मिल जाती थीं, वे जोहानिसबर्ग की बड़ी जेलमें नहीं मिल सकती थीं। उदाहरणके लिए, फोक्सरस्ट जेलमें श्री दाउद मुहम्मदको सिरपर बाँधने के लिए शाल दिया जाता था और पाजामा तो दूसरे लोगोंको भी दिया जाता था । श्री रुस्तमजी, श्री सोराबजी और श्री शापुरजीको अपनी-अपनी टोपी पहननेकी अनुमति थी । जोहानिसबर्ग जेलमें ऐसा होना मुश्किल था । इसी तरह जोहानिसबर्ग जेल में जब कैदी पहली बार दाखिल होते हैं, तब डॉक्टर उनकी जांच करता है। इस जाँचका हेतु यह कि कैदियों को कोई संक्रामक रोग हो तो उसकी दवा की जाये और उन्हें दूसरे कैदियोंसे अलग रखा जाये । इस कारण कैदियोंकी पूरी जांच की जाती है। कुछ कैदियोंको उपदंश आदि रोग होते हैं, इसलिए सबके गुह्य अवयवोंकी जाँच की जाती है । अतएव कैदियोंको बिल्कुल नंगा करके उनकी जांच की जाती है। काफिरोंको तो लगभग पन्द्रह मिनट तक नंगा खड़ा रखा जाता है, जिससे डॉक्टरका समय बचे । भारतीय कैदियोंको थोड़ी सुविधा है; उनसे उनका पाजामा जब डॉक्टर आता है तभी उतरवाया जाता है। बाकी लोगोंके कपड़े पहले से ही उतरवा दिये जाते हैं। लगभग सभी भारतीय कैदी पाजामा उतरवानेके इस रिवाजके खिलाफ हैं; फिर भी अधिकतर लोग सत्याग्रहकी लड़ाईका विचार करके आनाकानी नहीं Gandhi Heritage Porta
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