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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 9.pdf/२०६

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१७२ सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय महानुभावकी इच्छा के अनुसार महानुभाव और संघके बीचका सारा पत्र-व्यवहार गुप्त रखा जायेगा । मैं इस पत्र को इस आशा के साथ समाप्त करता हूँ कि महानुभावके हस्तक्षेपसे इस संघर्षका सुखद अन्त होगा । महानुभावका आज्ञाकारी सेवक, [ संलग्न कागज ] भारतीय स्थितिका विवरण परम माननीय लॉर्ड कर्जनकी सेवामें भेजनेके लिए भारतीयोंकी माँगें ब्योरेको बातोंके अलावा, स्थानीय सरकार और ब्रिटिश भारतीयोंके बीच नीचे लिखे दो खास सवाल हैं: १. १९०७ के एशियाई कानून २ का रद किया जाना । २. पढ़े-लिखे भारतीयोंका दर्जा । माँगोंके बारेमें दलीलें पहले सवालके बारेमें, भारतीयोंकी दलील यह है कि जनरल स्मट्सने एशियाई कानूनको रद करने का वादा किया था। यह वादा लिखा नहीं गया, लेकिन जनवरी १९०८ का समझौता' होनेके तीन दिन बाद, जनरल स्मट्सने अपने रिचमंडके भाषण में, जिसका खण्डन कभी नहीं किया गया है, यह कहा था : " मैंने उनसे यह कहा है कि जबतक देशमें एक भी ऐसा एशियाई है जिसने पंजीयन न कराया हो तबतक यह कानून रद न किया जायेगा ", और फिर यह कहा कि रद न किया जायेगा । 11 I जबतक देश में हरएक भारतीय पंजीयन न करा ले तबतक कानून लेकिन, इस वादेके अलावा, उपर्युक्त कानून अव्यावहारिक बताया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के अभी हालके फैसलोंसे इस रायका समर्थन होता है; और १९०८ के कानूनसे, जो उस वादेको थोड़ा-बहुत पूरा करने के लिए पास किया गया था, १९०७ का एशियाई कानून २ परिणाम-रूप में निष्प्रभाव हो गया । अब इस बारे में कोई शक नहीं किया जा सकता कि भारतीय यही समझते थे कि स्वेच्छया पंजीयन (वॉलंटरी रजिस्ट्रेशन) करा लेने की शर्तपर कानूनको रद करनेका वादा किया गया। ब्रिटिश भारतोयोंने इस विश्वासके साथ ही स्वेच्छया पंजीयन कराया था । प्रमुख भारतोयोंने भारतोयोंसे सम्बन्ध रखनेवाले समझौते के हिस्सेको पूरा करनेकी उत्सुकता में अपनेतईं बहुत खतरा उठाकर वैसा किया, क्योंकि अपनी मर्जीसे अँगुलियोंकी छाप देनेपर भो बहुत-से भारतोयोंने नाराजी जाहिर की थी। संघके मन्त्रीपर पंजीयन कार्यालय में जाते समय पाशविक हमला किया गया था, और उसके बाद संघ के तत्कालीन अध्यक्षपर उसी वजहसे हमला किया गया था । १. देखिए खण्ड ८, पृष्ठ ४३-४४ । २. देखिए खण्ड ८, परिशिष्ट ८ ।