१५१. जेल कौन जा सकता है ? सत्याग्रही कौन हो सकता है, इसपर हम पिछले हफ्ते संक्षेपमें विचार कर चुके हैं। ट्रान्सवालके आन्दोलनमें सत्याग्रह बहुत कुछ जेल जानेमें ही निहित रहा है। किन्तु सत्याग्रह कोई जेल जाकर समाप्त नहीं हो जाता । सत्याग्रहियोंको तो सुलीपर चढ़ना पड़ा है, ' तप्त लौह- स्तम्भका आलिंगन करना पड़ा है, पर्वतपर से लुढ़कना पड़ा है, खौलते तेलके कड़ाह में तैरना पड़ा है, जलते जंगलमें चलना पड़ा है, राज-पाट छोड़ कर नीचके घर बिकना पड़ा है और सिंहकी गुफामें रहना पड़ा है। इस प्रकार सत्याग्रहीकी परीक्षा संसारके भिन्न-भिन्न भागों में भिन्न-भिन्न ढंगोंसे हुई है । ट्रान्सवालमें सत्याग्रहियोंकी कसौटी केवल जेल जाने में ही रही है। इसलिए जेल कौन जा सकता है, यह प्रश्न बहुत उपयोगी है। कुछ भारतीय जेल जानेके लिए तैयार होनेपर भी कुछ कारणोंसे नहीं गये, या नहीं जा सके। ऐसे क्या कारण होंगे ? इस प्रश्नका उत्तर यह सवाल पूछने और उसका जवाब जान लेनेसे मिल जाता है कि जेल कौन जा सकता है । सत्याग्रहीमें जो गुण होने चाहिए और जिनपर हम विचार कर चुके हैं, वे सब थोड़ी- बहुत मात्रामें जेल जानेवाले लोगों में होने चाहिए। किन्तु उनके अतिरिक्त उनमें नीचे लिखी शक्तियोंकी आवश्यकता है : (१) व्यसनोंसे दूर रहना । (२) शरीर कसा हुआ रखना । (३) सोने और बैठनेमें आरामतलब न होना । (४) खानेमें अत्यन्त सादगी । (५) झूठी प्रतिष्ठाका त्याग । (६) धीरज । ये छः गुण (जिन्हें हम जेलकी षड्-सम्पत्ति कहेंगे ) खास तौरसे जेल जानेवाले भाइयोंके लिए आवश्यक हैं। अब हम इनकी जाँच कर लें। अनुभव यह हुआ है कि बीड़ी, शराब, सुपारी या चाय-पानके व्यसनोंके कारण जेल जानेवाले लोग ऊब गये हैं । ऐसा होनेके कारण या तो उन्होंने खुद जेलमें चोरी की है, अर्थात् सत्यका त्याग किया है, या वे दूसरी बार जेल जानेका नाम लेना तक भूल गये हैं। इसलिए व्यसन मात्रसे दूर रहना आवश्यक है। एक ही व्यसनकी छूट होनी चाहिए और वह है प्रभुके नामकी रट । नामर्द व्यक्ति सत्याग्रही नहीं बन सकता। वैसे ही दुर्बल शरीरवाला मनुष्य बहुत हद तक जेलके कष्ट बर्दाश्त नहीं कर सकता । शरीरकी शक्ति न होनेपर भी मनोवलसे बहुतसे वीरोंने कष्ट सहन किया है । ये उदाहरण असाधारण हैं । साधारण नियम तो यह है कि १. देखिए " सत्याग्रही कौन हो सकता है ?" पृष्ठ २२५-२७ । २, ३, ४, ५ और ६. क्रमशः ईसा, प्रह्लाद, सुधन्वा, नल-दमयन्ती और हरिश्चन्द्रकी गाथाओं का हवाला दिया गया है ।
पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 9.pdf/२७२
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