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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 9.pdf/६८७

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सांकेतिका ६४९ ओ'ग्रेडी, ३८३ ओ ओल्डफील्ड, डा० जोशिया, २८५ पा० टि०, ३८५ कंदासामी, ६ क कज़िन्स, का भारतीयोंपर आरोप, २४६ कनिघम, १३७ कमिश्नर ४८४ की जाँच के निष्कर्ष बहुतसे लोगों द्वारा अस्वीकृत, करोड़िया, ४६ कर्ज़न, लॉड, २८६, ३०९, ३२१, ३७० -बनाम किचनर, ४३१; की ट्रान्सवाल-संघर्ष में हस्तक्षेपकी सम्भावना, १७४; की सेवामें भेजनेके लिए भारतीयोंकी माँगें, १७२; को ट्रान्सवालवासी भारतीयों के मामलेमें दिल- चस्पी लेनेके लिए धन्यवाद, १७१; -से काछलिया द्वारा भारतीय शिष्टमण्डलको भेंट देने की प्रार्थना, १७१ कर्टिस, २१२ कल्याण, भीखा, -को देश निकालेकी सजा, ९६ कल्याणदास, ३६२, ४१३, ४२७ कसन, भीखा, २६२ कसस्सुल अम्बिया, का अध्ययन गांधीजी द्वारा हाजी हवीबकी सहायतासे, २७८ काछलिया, अहमद मुहम्मद, १२, १५, ४३-४४, ५०, ५९, ६१, ६९, ८७, १३३, १५६, १५९, १६६-६७, १८४, २१८, २३४, २५०-५१, २५३-५४, २५६- ५७, २६९-७०, २७७, २८८, ३०२ पा० टि०; -अपने लेनदारों या अपने आपको जोखिमसे बाहर रख कर व्यापार चलाने में असमर्थ, १५६; और चेट्टियारको पाँच-पाँच मासका सपरिश्रम कारावास, २८८; -जोहानिसबर्गकी जेलमें, २५३; -भारतीय दलके तपे हुए सैनिक, ५६ का अपना व्यापार बन्द करनेका निश्चय, १५५; का आत्मत्याग, १६७, १७७, १८५, का तार शिष्टमण्डलको चेतावनी तथा स्फूर्ति देनेवाला, २६९; का महान उत्तरदायित्व, १५: -की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी, १७७; की ब्रिटिश भारतीय संघके अध्यक्ष पदपर नियुक्ति, ३२; की दिवालिया होनेसे इज्जत जानेके बजाय बढ़ी, १७७; -की भारतीयोंको फिलहाल व्यापार करना छोड़नेकी सलाह, १५५; की लॉर्ड कर्ज़नसे भारतीय शिष्टमण्डलको भेंट देने की प्रार्थना, १७१; की लेनदारोंकी बैठक में गांधीजी द्वारा पैरवी, १५८; की वीरताका अस्वात द्वारा अनुकरण, १७७; के मतमें निजी हितसे सार्वजनिक हित ज्यादा जरूरी, १५७; को गांधीजीको आत्मत्यागके लिए बधाई, १७७; -को जर्मिस्टन जेलकी भोजन- तालिका के बारेमें वासन रणछोड़ द्वारा सूचना, ७४ को जेल-निदेशककी ओरसे मिले कुछ सन्देश, ७५; को लेनदारों द्वारा दिवालिया घोषित करा देनेकी परवाह नहीं, १७७; -द्वारा किये गये कार्यपर सारे भारतीय समाजको गर्व, १८५; -द्वारा खूनी कानून स्वीकार न करनेकी प्रतिज्ञा, ४१; -द्वारा जेल-निदेशकसे भोजन तालिकाकी प्रति भेजनेकी प्रार्थना, ५३; -द्वारा जेलमें तीन मामकी कड़ी कैदका उपभोग १८५६ -द्वारा पुलिस तथा हिरासत में लेनेवाले अधिकारीके कठोर बरताव करनेके बारेमें शिकायत, २५१ -द्वारा भारतीयोंके मामलेकी लगातार वकालत करने वालोंको धन्यवाद, १७०; - द्वारा लेनदारोंके सामने अपने हिसाबका चिठ्ठा पेश, १५९; - द्वारा शिकायतकी जाँचके लिए जेल- निदेशकको धन्यवाद, ७०; द्वारा समाजके लिए मानभरी गरीबी स्वीकार, १७७, १८५; -पर गांधीजी, ४१, ५६ काछलिया, ईसप, २५० काजी, ९४; -का मुकदमा, ४२; -से गांधीजीकी प्रिटोरिया जेल जाते समय मुलाकात, १६५, २२९; -से गांधीजी द्वारा १० शिलिंग ग्रहण, १५० काजी, इब्राहीम, जेलमें, १३३ काजी, इस्माइल, १६ काजी, ईसप, १२४ काजी, मुहम्मद, २४९ कॉटन, एच० ई० ए०, २८१, २८६ कॉटन, सर हेनरी, ३८१ पा० टि० ३८३, ४३०, ४५०; -का भाषण, ४५१ कादिर, अब्दुल, २८०, २८५, ३१६, ३२२-२३, ३३७, ३३९, ३४३, ३४९, ३५४, ३७५, ४०१, ४७२, ४९४, ४९६, ५२८९ -नेटालके प्रतिनिधि, ३४० कानमवाला, ईसप आमद, -द्वारा जुर्माना देनेसे इनकार, ४२; - पर हाइडेलबर्गमें जुर्माना, ४२ कानमिया, ईसपजी, को सात दिनके अन्दर उपनिवेश छोड़नेका नोटिस, ६४; -पंजीयन प्रमाणपत्र न लेनेका आरोप, ६४ Gandhi Heritage Porta