६५२ सम्पूर्ण गांधी वाङमय अब्दुर्रहमानकी भेंट, ३१०; -से भेंटकी कोई तारीख निश्चित नहीं, ३९४९ -से शिष्टमण्डलकी मुलाकात, ३४९, ३५४, ३५६, ४०७-८, ४१६; -से हुई भेंटका परिणाम लॉर्ड ऍम्टहिलको लिखे गये पत्र में, ४१४; - से हुई शिष्टमण्डलकी भेंटका सार, ४०८-११; - से हुईं शिष्टमण्डलकी मुलाकातपर गांधीजी, ४११ क्लार्क, ३७१ क्लीफर्ड, डॉ०, ४२९, ४६६; और मायरसे गांधीजीकी मुलाकात, ४४२; निर्णायकके रूपमें, नहीं, ४४२; को सह निर्णायकका पद, ५३२ क्विन, लिअंग, ६१, ६९, २३५, २६१, २९३, ३००-३ ३३१; और अस्वातपर गांधीजी २३४; - गांधीजी के मतमें सत्याग्रहके स्तम्भ, २३५; द्वारा लन्दनकी समितिको ५० पौंड प्रदान, ६८ खंडेरिया, २५० खमीसा, २४९, २६० ख खरसानी, १३५, १६५; -और मुहम्मद इब्राहीम की फोक्सर स्ट जेलमें दाउद मुहम्मदसे मुलाकात, १३५ खरे, ५४५ पा० टि० खान, जी० एच०, ५२९ खापरडे, ४५० खीमचन्द, २४७ खुसतानी, सुलेमान, ३०९ खूनी कानून, देखिए एशियाई कानून संशोधन अधिनियम खोलवाड़, ४३६ ग गणदेवी, खत्री दामोदर दुलम, ९४ गनी, अब्दुल, ४२, ४३, २४९, २५०, २६०९ -का अँगूठेका निशान देनेके लिए पश्चात्ताप, ४३; का किस्सा, ४३; का संघर्ष में चुस्त रहनेके लिए वचन, ४३; -द्वारा अँगूठेका निशान देना खेदजनक, १६ गवर्नर (ट्रान्सवाल), को अनुमतिपत्र जारी करनेके सम्बन्धमें पूर्ण विवेकाधिकार प्राप्त, ५४; -द्वारा अध्यादेश लागू करनेकी गरज से एक नया विभाग स्थापित, ५४ गवर्नर (जेल), को लिखे प्रार्थनापत्रका मसविदा, २०३-४; -द्वारा बड़ी जेलमें भारतीयों के लिए नया पाखाना खोलनेका आदेश, १५६; -से गांधीजीकी बातचीत, १६३ ' गवर्नर' जहाज, भारतीयोंको लेकर डर्बन आनेवाला, ८७; - से आनेवाले भारतीयोंसे मिलना गांधीजीका डर्बन आनेका उद्देश्य, ७६; -से कुछ भारतीयोंका आगमन, ८१ गांधी, (श्रीमती) कस्तूरबा, १०९, १५१ पा० टि०, १५२, १७५, १८०, १९९, २०२, २०५, २१३, २६५, ४१८९ - की बीमारीमें गांधीजी आने में असमर्थ, १०९; -के अच्छा होनेका समाचार जेलमें गांधीजीको उपलब्ध, २०५ गांधी, (श्रीमती) काशी, ३७३, ३९३ गांधी, खुशालचन्द, ४१८, ४५२ -से गांधीजीकी नारण- दासको उन्हें सौंप देनेकी माँग, ४५३; -से छगनलाल गांधीकी नारणदासको फीनिक्स में होम देनेकी माँग, ४५३ गांधी, (श्रीमती) चंचल बेन, १७४, २०२, २०५, २०८, २१३ गांधी, छगनलाल खुशालचन्द, २०६, २१२-१४, २६६, २८७, ३८१, ३९१-९३, ४१५, ४१८, ४३८-३९, ४५२-५३, ४६५, ५१९; -और मणिलाल गांधी द्वारा वेस्टकी बड़े प्रेमसे सार-सँभाल, ४१२; के सहयोगसे गांधीजीकी पोलकको बम्बई में एजेंसी खुलवानेकी सलाह, ३२२; -को गांधीजीका पढ़ानेका निश्चय, ४३७; - द्वारा अपने पितासे नारणदास गांधीको फीनिक्समें होम देनेकी माँग, ४५३ गांधी, देवदास (देवा), १५२, २०८, २०९ गांधी, नारणदास, ३९२, ४५३ के भारतीयोंके कष्टोंमें भाग लेनेके विचारसे गांधीजी प्रसन्न, ३९२; -को गांधीजीकी दक्षिण आफ्रिका जानेकी सलाह, ४५२ गांधी, मगनलाल २०८, २१३, २४१, पा० टि०, ३९१ पा० टि० गांधी, मणिलाल, १०८, १५१-५२, १७५, १९९, २०२-३, ३८२, ४१२; और छगनलाल गांधी द्वारा वेस्टकी बड़े प्रेमसे सार-सँभाल, ४१२; गांधीजीकी राय में अपने अध्ययनसे असन्तुष्ट, २१३; के कर्त्तव्य पर गांधीजी, ४३३ को गांधीजीकी पढ़ाईकी चिन्ता छोड़ने की सलाह, ४९५६ को गांधीजी द्वारा पत्रकी नकल पोल्क, कैलेनबैक व स्वामीजीको भेजनेका आदेश, २०९ - पर बीमारीमें वेस्टकी सेवा करनेके कारण गांधीजीको गर्व, ४१७ गांधी, मोहनदास करमचन्द, ३, ७, १२, १५, १७, २८. २९, ३९, ४४, ४७-४८, ५१ पा० टि०, ५५, ६१, ६९, ९४, ९८, ९९, १०९, ११६, १२०, १४५, Gandhi Heritage Porta
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