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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 9.pdf/७२९

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सांकेतिका करने को तैयार, ३८५; गांधीजीकी मांगको मंजूर करनेमें असमर्थ, ५२१, ५४४; -गांधीजीके मतमें लुटेरों के दलके सरदार, ६; -जो-कुछ देना चाहते हैं उससे भारतीय समाज सन्तुष्ट होनेमें असमर्थ, ४०८; तथा प्रगतिवादी दल द्वारा एशियाइयोंको एशियाई कानून रद करने का वचन देना आवश्यक, ५९; - प्रवासी कानून- में सुधार करने को तैयार नहीं, ४०९: - भारतीयों और एशियाश्योंकी दृष्टिमें बेईमानीके आरोपके अपराधी ५१; -भारतीयोंकी यूरोपियों के बराबर हक देनेकी मॉंग मंजूर करनेमें असमर्थ, ५२६; -भारतीयोंको सार निकाल कर छूछ देनेके इच्छुक, ५२१; -मामले में विलम्ब करके शिष्टमण्डलके कार्यकी सार्वजनिक चर्चाको रोकनेके इच्छुक, ३१७१ -लॉर्ड ऍम्टहिलके संशोधन स्वीकार करने के लिए अनिच्छुक, ४०८; - शिक्षित भारतीयों को निश्चित संख्या में स्थायी अनुमतिपत्र देनेके लिए तैयार, ३८५; -शिक्षित भारतीयोंको प्रवेशका अधिकार देनेके अनिच्छुक, ३८४; - शिक्षित भारतीयोंको रियायत के रूपमें अस्थायी अनुमतिपत्र लेकर ही आने देनेके लिए तैयार, १२९; - शिक्षित भारतीयोंको सीमित संख्या में अधिवासके स्थायी प्रमाणपत्र देने को तैयार, ४०४; समझौतेके लिए उत्सुक; ४०८; -समय प्राप्त करके सत्याग्रहियों का उत्साह तोड़ देनेके इच्छुक, ४७१; -सम्मेलनके कार्यक्रममें बहुत व्यस्त, ३१३; -का अपने वादेसे मुकरना, २९२; -का इंग्लैंडसे प्रस्थान, ३७५; -का कानून रद करनेका विचार, १८९; -का टाइम्स ढिढोरा पीटनेवाला, ५१; -का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण, ३७७; -का प्रतिकूल उत्तर आनेपर शिष्टमण्डलका दक्षिण आफ्रिकाको रवाना होना सम्भव नहीं, ४२४, ४२७९ का प्रवासी अधिनियम अपना बनाया कानून, ४०८; -का ब्रिटिश भारतीय समझौता समितिकी माँगोंके बारेमें जवाब, २६१; -का भारतीयोंको जवाब, ६३; -का मुलाकात के बारेमें सर मंचरजीको जवाब, ३६९; -का रायटरको सन्देश, ३७५; -की आपत्तिको दूर करनेके लिए प्रस्तावित संशोधन, ३३३; -फी एशियाई कानून रद करने की नई शर्त, ३३१; -की तरफसे गांधीनीको जेलमें २ धार्मिक पुस्तकें उपलब्ध, २३८; - की नई शर्तोंको भारतीयों द्वारा माननेसे इन्कार, २९३; -की भारतीयोंसे हर बार हार, ११; -की राय में भारतीयों की माँगे क्रियात्मक रूपमें पूर्ण, ५२४; की लॉर्ड क्र से बातचीत, ४८२; की ६९१ हॉस्केनके साथ बातचीत, ६९; के कथनानुसार एशियाई पंजीयन अधिनियम के अन्तर्गत अर्जी देनेपर शिक्षित भारतीयोंके प्रवेशपर आपत्ति नहीं, १४५; के कानून भारतीयोंकी अन्तरात्मा के विरुद्ध, २२०; के तरीकोंकी गांधीजीकी जानकारी, ३४१; -के देने में और भारतीयोंकी माँगमें आधारभूत अन्तर, ४०५० -के प्रस्ताव द्वारा मामला बिलकुल स्पष्ट ५२२; के मतमें अपने कुछ उग्र प्रतिनिधियोंके आन्दोलन से ऊबकर भारतीयोंका बहुमत कानूनके आगे घुटने टेकने- पर मजबूर, ३७५; के मतमें भारतीय कैदी ही आत्माकी आवाजके आधारपर आपत्ति करनेवाले, २९६३ -के रुखको ठीक-ठीक जानना शिष्टमण्डलके लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण, ४६०, ४६७; के साथ बातचीत असफल होनेपर गांधीजी द्वारा निराशा प्रकट, ५३२; -के सामने लॉर्ड कृ द्वारा ट्रान्सवाली भारतीयोंके प्रश्नको साम्राज्य के प्रश्नके रूपमें पेश, ४१०; को अंग्रेज न होनेके कारण सैद्धान्तिक समानताका ख्याल पसन्द नहीं, ४०९; -को उचित दिशामें प्रभावित करनेके लिऐ शिष्टमण्डल द्वारा दक्षिण आफ्रिक्री राजनयिकों को एकत्र करनेका प्रयास, २८४९ को एशियाई कौमोके उत्पीड़नसे दुःख, ५९; -के डैलोकी मार्फत गांधीजी द्वारा एक सुधार प्रेषित, ३२०; -को हॉस्केन द्वारा भारतीयोंका पत्र प्रेषित, ६९; -द्वारा अना- क्रामक प्रतिरोधके दबावसे ४ शर्तोंमें से तीन शर्त वापस, ५१; - द्वारा आफ्रिका-भर में भारतीयोंकी अप्रत्यक्ष सेवा, ७९; द्वारा उपनिवेश मन्त्रीके उत्तरकी प्रतीक्षा, ४७६; - द्वारा एशियाई अधिनियमको रद करने के अपने वादेसे इन्कार, ५२४; द्वारा एशियाई कानून रद करनेका अपना वचन पूरी तरह भंग करके चार शर्ते पेश, ५१; -द्वारा गांधीजीका सुधार नामंजूर, ३२०; -द्वारा गांधीजीकी राय में अनुमतिपत्र देना सम्भव, सीमित संख्या में स्थायी ३७९ -द्वारा जहाजमे रवाना होनेसे पहले रायटरको वक्तव्य, ३८३, ४७६; -द्वारा तुरन्त तारका जवाब, २६३; -द्वारा निर्दोष भारतीय पुर्तगाली प्रदेशके रास्ते ट्रान्सवालसे भारत निर्वासित, ३२८; -द्वारा पंजीयन कानून रद करने तथा निश्चि संख्यासे भारतीयोंको स्थायी निवासके प्रमाणपत्र देनेका प्रस्ताव, ५२०; द्वारा प्रवासी कानून में संशोधनके लिए मसविदा प्रचारित, २९३; - द्वारा ब्रिटिश नीति और मानवीय सिद्धान्तों की जड़-