पत्र : छगनलाल गांधी को
हमीदिया [इस्लामिक सोसाइटी] के प्रूफ के बारे में जाँच कर रहा हूँ। गुजराती के विषय में भी देख रहा हूँ।
मणिलाल के बारे में जो बन्दोवस्त किया है, वह ठीक है। सच पूछो तो आठ से नौ हो जाये तो भी किसी को कोई शिकायत नहीं करनी चाहिए। क्योंकि यदि लोग कुशल होंगे तो भी इस उम्मीद के साथ कि उनकी कुशलता का लाभ प्रेस को ही मिलेगा तथापि हम सावधान रहें, यही ठीक होगा। रविवार को तुम सब लोग इकट्ठे होंगे, ऐसा मैं मानता हूँ।
कल्याणदास को लिखने के लिए कहना। क्या दवा लेता है, वह भी बताये।
तुम पर काम का बोझ रहता, यह मैं समझ सकता हूँ। तुम्हारे अधीन गुजराती जाननेवाला व्यक्ति होना चाहिए, यह भी मैं जानता हूँ और ऐसा व्यक्ति रखने में मेरी सहमति है। प्रागजी[१] नामक जो व्यक्ति अभी आया है उसकी जाँच कर जाना। सरदार का लड़का साम भी रहने को राजी होगा। और लगता है उसे अंग्रेजी अच्छी आती है। रामनाथ को रखना हो तो भी ठीक है। इस बारे में तुम्हारा मन जो स्वीकार करे वही ठीक है।
हरिलाल पढ़ाई और आफिस का काम दोनों करता है। अकेले पढ़ाई करना उससे सम्भव न हो सका। मैं उसे सवेरे ७ से ८ और सम्भव हुआ तो रात को आधा घण्टा पढ़ाता हूँ।
हरिलाल ठक्कर के बारे में तुरन्त विचार कर मुझे उत्तर लिखना अथवा उससे कहना।
मोहनदास के आशीर्वाद
- मूल गुजराती (एस॰ एन॰ ४६८९) से
५१. पत्र : छगनलाल गांधी को
जोहानिसबर्ग
रविवार, १० फरवरी, १९०७
आज कुछ [लेखन] सामग्री भेज रहा हूँ। 'एडवर्टाइजर' के लेख का मुख्तसर अनुवाद करना अथवा पूरा अनुवाद देना। 'मर्क्युरी' में श्री आर्थर वेड का भाषण[२] है, उसके भी प्रमुख भाग का अनुवाद प्रकाशित करना। यहाँ से अब मैं जो आवश्यक हो वही सामग्री भेजूँगा। उपर्युक्त दोनों लेख यदि इस बार के अंक में प्रकाशित हो गये हो तो बेहतर होगा। इस अंक की कविता भी
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