सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय
हेजाज़[१] सम्बन्धी लेख के विषय में यदि तुम्हें कोई प्रतिक्रिया दिखाई दी हो तो बताना। प्रतिक्रिया किस प्रकार की थी? कौन बोलता था? 'अल इस्लाम' के अंक मिले हैं।
ठाकुर के बारे में जहाँ तुम्हें उचित लगे वहाँ समाधान करना चाहिए। जैसा मैंने कहा है यदि तुम वैसा करोगे तो धीरे-धीरे उसे समझा सकोगे। इस सम्बन्ध में तुम मुझे लिखते रहना जिससे यह मेरी दृष्टि से ओझल न हो जाये और मैं भी प्रसंग आने पर लिखता रहूँ।
श्री मेकिन्टायर चले गये हैं। उसके बिना भी हम चला सकते हैं। वे किसी जगह की कोशिश में लगे हुए हैं।
कल्याणदास के बारे में मैंने कुछ सलाह की है। उसे फुर्सत में उत्तर लिखना।
घर खर्च के पहले के [आँकड़े] मिले हैं, वह तथा हाल के [आँकड़े] देखकर मुझे भय लगने लगा है। भूल चाहे किसी से भी हुई हो लेकिन यदि उतना खर्च होगा तो मैं पूरा न कर सकूँगा, ऐसा मैं समझता हूँ। इतना ज्यादा खर्च कैसे हुआ, यह आँकड़ों से बताने की जरूरत है जिससे कि मैं समझ सकूँ।
चंचल[२] के बारे में छबीलदास[३] को जो खबर मालूम है वही उसने मुझे दी है। बम्बई से तार की प्रतीक्षा में हूँ। चंची बम्बई में बहुत घबराती है। मैंने बम्बई में तार भी दिया है कि चँची को एकदम भेज दें।
लछीराम का नाम (इ॰ ओ॰ के विज्ञापन के पन्नों से) कैसे निकला सो समझ में नहीं आता, पहले तो था। तुम उसे वहाँ से लिखना। मैं यहाँ से लिखता हूँ। श्री आँगलिया की ओर से पैसे मिले हैं कि उधार खाता है? इस्माइल गोरा की ओर से बाकी के पैसे मिले क्या?
'रामायण' का काम शुरू हो जाये तो अच्छा हो।[४] वहाँ से तुम आनन्दलाल से मिलकर कोई उपाय सोचो तो बेहतर हो।
उमर सेठ को पाँच प्रतियाँ भेजनी चाहिए थीं अब चार भेजना। क्या तुम्हें मदनजी का समाचार पत्र मिल गया था? तुम्हारे द्वारा चिह्नित भाग मैंने पढ़ा था।
मुझे नहीं लगता कि अब तुम्हारे पत्र का कोई उत्तर बाकी बचा है।
मोहनदास के आशीर्वाद
- गुजराती की नकल (सी॰ डब्ल्यू॰ १११६०) से। सौजन्य : छगनलाल गांधी
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