पत्र : मगनलाल हरिभाई पटेल को
और अब आप पत्र लिखने में विलम्ब करने के लिए मुझे क्षमा करें। आपके दुःख मैं आपके साथ मेरी सहानुभूति है। आप पर जो दुःख आ पड़ा है उसे सहन करने के लिए आपका तत्वज्ञान पर्याप्त है। आपका स्वास्थ्य कैसा है कृपया यह अवश्य लिखें।
हम दोनों की ओर से आदरसहित—
हृदय से आपका
मो॰ क॰ गांधी
- मूल अंग्रेजी से : पद्मजा नायडू पेपर्स। सौजन्य : नेहरू-स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय
८१. पत्र : मगनभाई हरिभाई पटेल को
रंगून जाते हुए
फाल्गुन वदी १५, [१५ मार्च, १९१५][१]
हरिलाल अलग हो गया है। उसे मैंने ४५ रु॰ दिये हैं। इस रकम से वह अपनी मर्जी से काम चलायेगा। इसमें कुछ अनुचित नहीं है।
हम सोमवार को अथवा तो अन्ततः गुरुवार को स्टीमर से वापस लोटेंगे। वापसी में कलकत्ता में दो दिन रुकना पड़ेगा, ऐसा लगता है। अप्रैल के आरम्भ में गुरुकुल पहुँचने का विचार स्थगित कर दिया है। शान्तिनिकेतन[२] में कुछ रुकना पड़ेगा। नया प्रयोग[३] सफल हो, इसके लिए हमें हर सम्भव उपाय करने होंगे।
मणिलाल को सूखे मेवे भेजने के लिए कहा था, सो मिले होंगे और. . .[४] मात्र से आपने चलाया होगा।
फकीरी और बाबा अब बिलकुल ठीक हो गये होंगे।
मोहनदास के आशीर्वाद
- गुजराती की फोटो-नकल (सी॰ डब्ल्यू॰ ११००३) से। सौजन्य : सूर्यकान्त सी॰ पटेल
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