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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/१३८

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

जानकारी होना आवश्यक है। मैं जानकारी हासिल करने आया हूं और अब भारत में ही जीने, मरने की आशा करता हूं। कई वर्षों पहले जब अपने गुरु श्री गोखले से मिला था तभी मैंने महसूस किया कि राजनीति के क्षेत्र में मुझे अपना गुरु मिल गया है। मैंने विनम्रतापूर्वक निष्ठा के साथ उनका अनुसरण करने का प्रयास किया है। धार्मिक क्षेत्र में मुझे अब तक कोई धार्मिक गुरु नहीं मिला है। मगर इस बारे में मैं लोगों को गलतफहमी में नहीं रखूंगा। मेरे गुरु श्री गोखले बड़े धार्मिक पुरुष थे। कोई भी जिसने उनके सानिध्य में रहकर काम किया हो उनकी धार्मिक प्रकृति की यथार्थता से, उसकी गहराई से, प्रभावित हुए बिना नहीं रहा। श्री गोखले के लिए ईश्वर और सत्य एक महान यथार्थता थी। यही बात उनके सतत और अथक परिश्रम की द्योतक है जिसका उनकी शारीरिक शक्ति पर काफी जोर पड़ा। वे हिन्दू थे, मगर एक आदर्श स्वरूप थे। एक बार एक हिन्दू सन्यासी उनके पास आया। उसने सुझाव दिया कि हिन्दुओं के राजनीतिक उद्देश्य को इस तरह बढ़ावा दिया जाये ताकि मुसलमानों को दबाया जा सके। उसने लम्बे चौड़े धार्मिक कारण बताकर अपने सुझाव पर जोर दिया। श्री गोखले ने इस व्यक्ति को निम्नलिखित शब्दों में उत्तर दिया – "यदि मुझे हिन्दु होने के लिए जैसा आप चाहते हैं वैसा करना होगा तो आप बाहर छपवा दें कि मैं हिन्दू नहीं हूं।" मगर श्री गोखले हिन्दू थे। निर्भयता उनका धर्म था। उन्हें ईश्वर में और सत्य की शाश्वत विजय में गहरी आस्था थी। यही कारण था कि वे तथ्यों की जानकारी प्राप्त करने के लिए और सत्य की खोज करने के लिए कठिन परिश्रम करते रहे थे। भारत[वासियों] की सबसे बड़ी आवश्यकता ईश्वर से अत्याधिक भय रखने की है – केवल ईश्वर से भय हो, मनुष्य से डरने की आवश्यकता नहीं है। इसी बात की जरूरत है अराजकता की नहीं। जहां अराजकता मौजूद होगी वहां जाहिर है कि ईश्वर का डर होगा ही नहीं। बुराई का सामना करने के लिए हमें ईश्वर और सत्य की ताकत का सहारा लेना चाहिए। आपके कालेज की दीवार पर प्राचीन सूत्र लिखा है कि 'सत्यमेव जयते'। सत्य के वेधनशील प्रकाश पुंज के आगे किसी भी प्रकार की बुराई ठहर ही नहीं सकती। किसी बुराई को स्वयं दुःख भोगकर ईश्वर से प्राप्त शक्ति से मिटाया जा सकता है न कि दूसरों को कष्ट पहुंचाकर। यही वह रहस्य है।

अतः ईश्वर से डरो और मनुष्य से मत डरो। याद रखो कि हमारे ऋषियों की महान देन अहिंसा हमारा धर्म है। हम सबको अपने जीवन में यहां तक कि राजनीति में भी ईश्वर से भय रखने के धर्म को प्रस्तुत करना होगा। केवल यह धर्म और सत्य के प्रति उत्कट प्रेम ही हमारी सहायता करेगा। अतः मैं आपको सलाह दूंगा कि आप अपने गुरुजनों की आज्ञा का पालन करें, कालेज के आदर्श वाक्य पर खरे उतरें और सत्य में निष्ठा रखें ताकि आप मातृभूमि की नागरिकता योग्यतापूर्वक वहन कर सकें।

इसके बाद श्री गांधी ने विद्यार्थियों को दक्षिण आफ्रिका के संकट के समय उत्कृष्ट सहायता करने के लिए और फीनिक्स के लड़के जब प्रिंसिपल के मेहमान थे तब उनकी आवभगत और सहृदयता दिखाने के लिए धन्यवाद दिया और जोरशोर से देर तक तालियों की गड़गड़ाहट के बीच पुनः अपना स्थान ग्रहण किया।

[अंग्रेजी से]

सेंट स्टीफन्स कालेज मैगजीन, अंक. ३२, पृ. ६-९

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