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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/१४८

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१००. पत्र : वालजी गो॰ देसाई को[]

अहमदाबाद
सोमवार, २४ जनवरी, १९१६

भाईश्री वालजी,

...और यदि बिच्छू का काटा व्यक्ति अपने अनुभव से दूसरों को बचा सकता है तो इंग्लैण्ड का मेरा सुझाव कई लोगों को समझाने के लिए काफी होना चाहिए।

आपको एल॰ एल॰ बी॰ करनी ही होगी। बेरिस्टर बनने में कोई भी व्यक्ति आपकी मदद न करे, ऐसी मेरी इच्छा है। वकील बनने से आपका स्वास्थ्य खराब न हो ऐसा... तो उनका उपकार होगा।

अपने शरीर के लिए दवा के रूप में आपको पांच जहर ही सूझे, यह आपके पिछले कर्मों का दुष्परिणाम है। जहर को अमृत कहने से उसका दोष दूर नहीं हो जाता।

यदि आप टॉल्स्टॉय की 'व्हाट इज आर्ट' नामक पुस्तक प्रकाशित करने के लिए तैयार हों और उसके प्रूफ पढ़ते हैं तो आपको १०० रु॰ तो मिलेगा ही। काम... में प्रतिदिन चार घंटे के हिसाब से दो महीने चलेगा। आपको काम वहीं बैठे हुए करना होगा...। काम आपसे करवाऊंगा। और आपको वहीं बैठे–बैठे ५० रु॰ मिलें, ऐसी व्यवस्था कर सकूंगा। यदि आप इस काम में रोज चार घंटे लगायेंगे तो इस वर्ष एल॰ एल॰ बी॰ की दूसरी परीक्षा दे पायेंगे, इस बारे में मुझे शंका है।

मैं ३१ तारीख को काशी जाने वाला हूं।[] वहां से लौटकर मद्रास जाऊंगा। यदि आप आना चाहें तो दोनों स्थानों पर ले जाऊंगा।

मैं किसी भी समय युद्ध के लिए चल रहे कार्यों के लिए रुक सकता हूं। आप आयेंगे तो अच्छा होगा।

वीरमगाम से पत्र मिला है।

नडियाद कल हो आया।

मोहनदास के वन्देमातरम्

गुजराती की नकल (सी॰ डब्ल्यू॰ ११२७२) से। सौजन्य : वालजी गो॰ देसाई

  1. शुरू के कुछ वाक्यों में कुछ शब्द अस्पष्ट हैं।
  2. बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के शिलान्यास समारोह के लिए; देखिए "भाषण बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में", ६-२-१९१६।
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