सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/१५१

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।

 

१०५. पत्र : मगनभाई हरिभाई पटेल को

गुरुवार, फाल्गुन १५ [१९ मार्च, १९१६][]

भाईश्री मगनभाई,

तुम्हारा पत्र मिला। जान पड़ता है तुम उत्तेजित हो गये हो। अपने गहरे उद्गारों से मुझे परिचित करा दिया यह अच्छा किया। हमें जो कुछ करना है वह अपनी शक्ति के अनुसार करना चाहिए। इसलिए यदि तुम आश्रम का रहन–सहन नहीं अपना सकते, तो वहां से चले जाना ठीक समझना।

दक्षिण आफ्रिका के बारे में सोचना बेकार है। तुम्हारी तबीयत इतनी लम्बी यात्रा के योग्य भी नहीं है और फिर स्वयं श्री पोलक का भी अनिश्चित है। उनकी स्थिति अटपटी है। तुम वहां कुछ नहीं कर सकोगे। इसमें मुझे सन्देह नहीं है। धन कमाने की खातिर तुम्हें सर्वेण्ट्स ऑफ इंडिया सोसाइटी में नहीं जाना चाहिए। इसलिए धन कमाने का एक ही तरीका है जो अन्य लोग भी अपनाते हैं। तुम्हारे लिए उसमें तुम्हारी तबीयत बाधा डालती है। तुम्हारे बारे में मेरी राय है कि जितना धन तुम सत्याग्रह आन्दोलन से प्राप्त कर सके हो उससे अधिक चोरी के अतिरिक्त किसी भी दूसरी तरह से नहीं पा सकते थे। यह नहीं कहा जा सकता कि यदि तुम आन्दोलन में भाग न लेते तो तुम्हारी आर्थिक स्थिति सुधरी होती। इसलिए यदि तुम डट कर आश्रम में नहीं रह सकते हो तो तुम्हें अपने पिताजी को इस स्थिति से अवगत करा देना चाहिए। तुम्हें अपने घर में रहकर जैसा तुम्हारे पिताजी कहें वैसा करना चाहिए। तुम्हें अपने पिता की आज्ञा के वश में रहकर जैसा वे कहें वैसा ही करना चाहिए फिर चाहे उससे कुछ भी प्राप्त हो वह ठीक है। अपनी परेशानी को दूर करने के लिए जैसा वे कहें वही करो। अन्त में ऐसा करने में ही तुम आगे बढ़ सकोगे। इस तरह की आत्म-रसता में भी धार्मिक सूक्ष्मता रहती है।

मुझे तुम्हारे ऊपर बहुत दया आती है। तुम्हारे लिए आश्रम में रहना जितना मुश्किल है उतना ही आश्रम से जाना भी। तुम्हारी जैसी स्थिति किसी की भी नहीं है। इस पर पूरी तरह विचार करना। मैंने पंजाब वगैरह जाने का विचार छोड़ दिया है। मैं वहां शनिवार की शाम तक पहुंचने की उम्मीद करता हूं नहीं तो ज्यादा से ज्यादा देर हुई तो रविवार तक।

फकीरी की मृत्यु से उत्पन्न विचार जब मिलूंगा तब विचार बताऊंगा।

तुम्हारी पत्नी काम नहीं करती ऐसा मैं समझता हूं। इस समय वह बुरी नीयत से आई है। उसने तुम्हारे चारों ओर जाल बिछा दिया है। प्रभु तुम्हारी सहायता करे।

बापू के आशीर्वाद

गुजराती की फोटो–नकल (सी॰ डब्ल्यू॰ ११००८) से। सौजन्य : सूर्यकान्त सी॰ पटेल

  1. पत्र में फकीरी की मृत्यु के उल्लेख से यह पत्र १९१६ में लिखा जान पड़ता है: देखिए पिछला शीर्षक। उस वर्ष फाल्गुन १५, १९ मार्च को थी।
१११