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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/१६६

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१२२. पत्र : भगवानजी अनूपचन्द मेहता को

अहमदाबाद
भाद्र वदी ४ [५ सितम्बर, १९१७][]

भाईश्री भगवानजी,

आपका पत्र मिला, आभारी हूं। वीरमगाम का निर्णय ठीक हुआ।[]

रजवाड़ों का प्रश्न मेरे मन में तो घूमता ही रहता है। उसके आगे का कार्यक्रम अभी बन नहीं पाया है।

मोहनदास गांधी के वन्देमातरम्

भगवानजी अनूपचन्द वकील
राजकोट

गुजराती की फोटो नकल (जी॰ एन॰ ५८०५) से। सी॰ डब्ल्यू॰ ३०२८ से भी; सौजन्य : नारणदास गांधी

१२३. टिप्पणी : आगन्तुक–पुस्तिका में

कार्तिक पूर्णिमा, संवत १९७४ [ २८ नवम्बर, १९१७]

इस पुस्तकालय की मुलाकात लेकर मैं बहोत खुश हुआ हूं। पुस्तकालय हमेशा बड़ती रहेगी ऐसी उमेद रखता हुं।

मोहनदास करमचंद गांधी

मूल हिन्दी (सी॰ डब्ल्यू॰ ११२६८) से। सौजन्य : मारवाड़ी सार्वजनिक पुस्तकालय, दिल्ली

  1. वर्ष का निर्धारण पत्र में वीरमगाम के बारे में निर्णय होने के उल्लेख से किया गया है।
  2. गांधीजी ने वीरमगाम की सीमा पर ली जानेवाली चुंगी को रद्द करने के लिए सरकार को पत्र लिखा था और इस बारे में बम्बई के गवर्नर और वाइसराय से बातचीत भी की थी। ७ नवम्बर, १९१७ को यह चुंगी उठा ली गई थी। देखिए "प्रस्ताव : प्रथम गुजरात राजनीतिक परिदृश्य में", ३-११-१९१७ और ५-११-१९१७।
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