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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/१७४

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

लगातार इसके खिलाफ बयान देने के बावजूद उनके सच या झूठ होने के बारे में खुद तसल्ली न करूंगा तो स्पष्टत: अपने कर्त्तव्य से विमुख होऊंगा।

मेरे स्वतः गृहीत कार्य का परिणाम आने तक यदि आप कृपा करके लगान वसूली स्थगित रखने की उदारता दिखा सकें तो आप खेड़ा [वासियों] की उत्तेजना शान्त करने में बड़ी सहायता करेंगे।[]

यदि आपके ख्याल से मुझे आम सुविधाएं मुहैया की जा सकती हैं तो क्या मैं यह अनुरोध कर सकता हूं कि आप कलेक्टर से मेरी मदद के लिए मुझे वे सुविधाएं प्रदान करने के लिए कहेंगे जो एक लोक–सेवक को वैध रीति से प्रदान की जा सकती हैं? मैं आगे यह भी कहना चाहूंगा कि मेरे जांच–पड़ताल करने के समय यदि आप अपने किसी प्रतिनिधि की मौजदूगी चाहेंगे तो उसमें मुझे कोई आपत्ति न होगी। विश्वास है कि आप मुझे यह लम्बा पत्र लिखने के लिए क्षमा करेंगे।

२६ फरवरी को दरबार में उपस्थित होने के निमन्त्रण को तब दिल्ली जाने का कार्यक्रम होने के कारण अस्वीकार करना पड़ा था। मगर अब बदली हुई परिस्थितियों में मुझे आशा है कि मैं दरबार में उपस्थित होकर अपना अभिवादन अर्पित कर सकूंगा।

हृदय से आपका
मो॰ क॰ गांधी

अंग्रेजी की नकल (सी॰ डब्ल्यू॰ १०६३०) से। सौजन्य : छगनलाल गांधी

  1. एफ॰ जी॰ प्रैट ने १६ फरवरी, १९१८ के अपने पत्र में लगान वसूली मुल्तवी करने से इन्कार कर दिया था।
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