सामग्री पर जाएँ

पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/१७५

विकिस्रोत से
यह पृष्ठ जाँच लिया गया है।

 

१३३. पत्र : जे॰ क्रिरर को

सत्याग्रह आश्रम
साबरमती
१६ फरवरी, १९१८

प्रिय श्री क्रिरर,

आपके ९ फरवरी के पत्र की, जिसमें खेड़ा शिष्टमण्डल[] की प्रार्थना के सम्बन्ध में महामान्य का निर्णय प्रेषित किया गया था, प्राप्ति सूचना भेजने में मुझे विलम्ब हुआ। क्योंकि उसके पहले में श्री प्रैट के साथ श्री देवधर और अन्य मित्रों की भेंटवार्ता का परिणाम जानने के लिए इच्छुक था जिसमें मैं भी उपस्थित था। मैंने श्री प्रैट को जो पत्र लिखा है उसकी नकल अब इस पत्र के साथ भेज रहा हूं। पत्र में मैं क्या कर रहा हूं, यह स्पष्ट किया गया है। मैं खेड़ा के लिए रवाना हो रहा हूं ताकि यदि मैं देखता हूं कि फसल खराब होने की खबरों में सच्चाई नहीं है तो जो आन्दोलन चल रहा है उसे, जहां तक मेरा वश है, रोक सकूं। अथवा यदि मुझे बयान में सच्चाई नजर आती है तो में आन्दोलन की जो स्वस्थ एवं उन्नत दिशा समझता हूं उस ओर मार्ग–निर्देशन करूं। मैं अभी भी यह सोचे वगैर नहीं रह सकता कि यदि सार्वजनिक जांच की अनुमति प्रदान की जाती तो उससे सारा आन्दोलन एकदम शान्त हो जाता। श्री प्रैट के नाम लिखे मेरे पत्र में लगान वसूली मुल्तवी करने के अनुरोध को यदि मान लिया जाता है तो भी यही नतीजा हासिल हो सकता है। मुझे महामान्य को दिये इस आश्वासन को दुहराने की जरूरत नहीं है कि कोई भी सख्त कदम उठाने से पहले मैं उनसे भेंट करके उनको अपनी स्थिति से अवगत कराऊंगा।

भवदीय
मो॰ क॰ गांधी

अंग्रेजी की नकल (सी॰ डब्ल्यू॰ १०६३२) से सौजन्य : छगनलाल गांधी

  1. जो ५ फरवरी को बम्बई के गवर्नर से मिला था।
१३५