१३५. पत्र : जे॰ घोषाल को
नडियाद
२२ फरवरी, १९१८
कल आपके पास से जाने के बाद मैं नैका और नवगांव गया था। देखता हूं कि इन दो गांवों के ग्रामीणों की हालत दयनीय है। मेरे ख्याल से वे लगान में पूरी छूट लेने का काफी जोरदार मामला तैयार कर सकते हैं। उन्होंने मुझे बताया कि एक के बाद एक लगातार तीन मौसम की फसलें खराब रही हैं। मैं उनका [रुपये में] आना के हिसाब से मूल्यांकन निकालने की कोशिश करता हूं। मैं समझता हूं कि हर मामले में फसल रुपये में चार आने से भी कम हैं, यह आसानी से साबित किया जा सकता है। उनका कहना है कि उनकी जमीन पर खारी नहर का पानी चढ़ जाने के कारण उनकी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। उनकी रबी की फसल बहुत थोड़ी होती है। यह बात नैका से अधिक नवगांव के बारे में सही है। दोनों ही स्थानों में रबी की फसल प्रति एकड़ के हिसाब से रुपये में चार आने से अधिक नहीं हुई है और गेहूं की फसल में बीमारी लग जाने के कारण जो छोटे से हिस्से में रबी की खेती की गई है उसका मूल्यांकन कर पाना कठिन है। फिर भी देखता हूं कि नैका के किसानों को बकाया लगान न अदा करने के कारण सम्पत्ति जब्त करने के करीब पन्द्रह नोटिस दिये गये हैं। इर्द–गिर्द के गांवों के किसान भी अपनी फसल के बारे में यही बातें करते हैं। अभी मैं उनकी ओर से निवेदन करने में असमर्थ हूं। उन हिस्सों में जल्दी ही मुझे अपनी जांच पूरी होने की उम्मीद है। क्या मैं यह अनुरोध कर सकता हूं कि नैका के कुछ निवासियों को दिये गये नोटिस वापस ले लिये जायें और दसक्रोई की हालत के बारे में पूरी जांच–पड़ताल की जाये।
मैं आपसे यह पूछना भूल गया कि आप उन लोगों के और उन गांवों के नाम बता सकते हैं जिनमें उनके द्वारा डेयरी को दूध बेचनेवालों पर अनुचित दबाव डाले जाने का आरोप है।
मो॰ क॰ गांधी
अंग्रेजी की नकल (सी॰ डब्ल्यू॰ १०६३६) से। सौजन्य : छगनलाल गांधी