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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/१९०

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

कटुता के लड़ी जा सकती है। यदि दोनों पक्ष अपना लक्ष्य पाने के लिए केवल सच्चाई व ईमानदारी का रास्ता अपनायें तो अन्त में दोनों की जीत होगी।

हृदय से आपका
मो॰ क॰ गांधी

अंग्रेजी की नकल (सी॰ डब्ल्यू॰ १०६५८) से। सौजन्य : छगनलाल गांधी

१४५. पत्र : जे॰ घोषाल को

लिम्बासी
२ अप्रैल, १९१८

प्रिय श्री घोषाल,

मैं कल सुबह नडियाद पहुंचा था और आज यहां आया हूं। कहना पड़ता है कि तमाम फसल की कुर्की करने का नोटिस देना एक क्रूरतापूर्ण कार्यवाही है। गांववाले राहत की मांग करने के लिए एक याचिका भेज रहे हैं। मैं चाहता हूं कि सरकार और जनता के बीच की लड़ाई न्यायोचित होनी चाहिए। उससे अन्त में दोनों को लाभ होगा और बाद में कोई कटुता शेष न रहेगी। मैंने सुना है कि कुछ लोगों के साथ शारीरिक हिंसा भी की गई है। मैं यह जानता हूं कि ऐसा केवल गैर जिम्मेदाराना लोगों ने किया होगा। मगर यदि निचले स्तर के कर्मचारी जान और समझ लें कि सरकार सख्ती नहीं करना चाहती है तो उसे टाला जा सकता था।

हृदय से आपका
मो॰ क॰ गांधी

मेरा स्थायी पता नडियाद है।

अंग्रेजी की नकल (सी॰ डब्ल्यू॰ १०६६७) से। सौजन्य : छगनलाल गांधी

१४६. पत्र : सर जेम्स डुबाले को

नडियाद
४ अप्रैल, १९१८

प्रिय सर जेम्स डुबाले,

यद्यपि खेड़ा का मामला आपके विभाग के मातहत नहीं आता, तथापि मेरा खयाल है कि आप कार्यकारिणी परिषद के सदस्य हैं और सम्भवतः सारे सदस्यों में से आप ही मुझे सबसे अच्छी तरह जानते हैं, अतः आपके सामने स्थिति प्रस्तुत करने में मुझे कोई हिचक न होगी।

यह स्थिति मेरे प्रयत्नों से अथवा किसी भी रूप में होमरूल पार्टी के कार्यों के फलस्वरूप

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