मैं सम्मेलन [मैं शामिल होने] के लिए बम्बई जा रहा हूं। मुझे इसी १६ तारीख तक लौटने की आशा है। इस दौरान श्री वल्लभभाई पटेल आपकी सेवार्थ प्रस्तुत रहेंगे।
हृदय से आपका
मो॰ क॰ गांधी
अंग्रेजी की नकल (सी॰ डब्ल्यू॰ १०६९८) से। सौजन्य : छगनलाल गांधी
१६७. पत्र : जी॰ ए॰ नटेसन को
[१३ जून, १९१८ से पूर्व][१]
मैंने देवदास को तमिल सीखने के लिए भेज दिया है। आप उसे अपनी देखरेख में अपने ही साथ रखें। चूंकि वह मेरा पुत्र है, इसलिए उस पर विशेष अनुग्रह दिखाने की आवश्यकता नहीं है। उसे अपना भोजन उपार्जित करके तमिल सीखनी होगी।
[अंग्रेजी से]
द मेल, २–११–१९६८
१६८. पत्र : जे॰ केर को
नडियाद
१४ जून, १९१८
अभी–अभी बम्बई से लौटने पर मैंने श्री वल्लभभाई पटेल के नाम लिखा आपका १० जून का पत्र पढ़ा है।
यह स्पष्ट है कि आपकी हिदायतें अबतक मामलातदारों और तलातियों तक नहीं पहुंची हैं। क्योंकि उन्होंने उन लोगों से चौथाई वसूल की है जिनके माल कुर्क तो कर लिये गये थे मगर बेचे नहीं गये थे। मैं यह मानकर चलता हूं कि ऐसे सभी मामलों में वसूल की गई चौथाई वापस कर दी जायेगी।
जिन लोगों के खिलाफ कुर्की के आदेश जारी किये गये हैं उनसे चौथाई वसूल करने के आपके निर्णय के कारण ४ जून के अपने पत्र में आपने जो स्थिति अपनाई थी और आपने हमारी बातचीत के दौरान मेरे मन पर जो छाप छोड़ी थी, उससे विभिन्न स्थिति पैदा हो गई है। मैंने अपने
- ↑ पत्र के पाठ से जान पड़ता है कि गांधीजी ने यह पत्र जी॰ ए॰ नटेसन के नाम १३ जून, १९१८ को लिखे पत्र से पहले लिखा था।