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पृष्ठ:सम्पूर्ण गाँधी वांग्मय Sampurna Gandhi, vol. 91.pdf/२१२

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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय

निमन्त्रण पर कल मैं एक सभा को सम्बोधित करूंगा। कुछ ही दिनों में मुझे मालूम हो जायेगा कि मेरे भाषण की कोई प्रतिक्रिया हुई अथवा नहीं। बहरहाल हजारों की संख्या में सैनिकों की भर्ती करने के लिए मेरी ओर से कोई कसर नहीं रखी जायेगी। इससे कुछ भी कम में मुझे सन्तोष न होगा। आप मेरे पहले पर्चे[] का अनुवाद समाचारपत्रों में देखेंगे। मैं इस पत्र के साथ उसकी गुजराती प्रति भेज रहा हूं।

और अब अलीभाइयों के सम्बन्ध में। मैं किसी निश्चित अवधि की बात नहीं सोच रहा था। मगर आपकी बातों से मैंने समझा था कि यदि मैं एक माह प्रतीक्षा करूं तो उन्हें रिहा हो गया पाऊंगा। मैं गलत समझा अथवा सही, इसका अधिक महत्व नहीं है। निःसन्देह मैं आपके शब्दों की अपनी व्याख्या के बजाय आप जो व्याख्या करते हैं वही मानूंगा। मगर यह जरूरी है कि अली भाइयों को कैद करने की आवश्यकता कानूनी अथवा सार्वजनिक तौर पर प्रमाणित की जानी चाहिए या उन्हें रिहा कर देना चाहिए। केवल मेरे इन शब्दों के आधार पर मैं आपकी मदद से अली भाइयों की रिहाई की कोशिश कर रहा हूं, एक बड़ा आन्दोलन स्थगित हो गया है। तब क्या आप इस मामले में प्रयत्नशील न होंगे? हमारे यहां लोगों में यह चर्चा हो रही है कि अली भाइयों को केवल सर विलियम विंसेन्ट[] और सर चार्ल्स क्लीवलैण्ड को सन्तुष्ट करने के लिए जेल में रखा गया है। मैंने सर विलियम से निवेदन करने का प्रयास किया था मगर उन्हें नाराज कर दिया। अली भाइयों के नाम से ही वे भड़क उठे। और मैं पूरी तरह हिम्मत हार बैठा। आपने (सरकार ने) युद्ध संचालन की खातिर शान्ति का वातावरण रखने की बात कही है। जब तक आप स्वयं शान्ति भंग नहीं होने देते तबतक आप उसके अधिकारी हैं। मगर क्या मैं निवेदन कर सकता हूं कि अपने 'तुच्छ' भर्ती के काम के लिए मुझे भी शान्तिमय वातावरण की आवश्यकता है और यह तभी हो सकती है जब सरकार अली भाइयों को रिहा कर दे, या जिन्हें आप अपना मित्र कहते हैं उन्हें अली भाइयों को रिहा न किये जाने का पर्याप्त औचित्य बतायें।

हृदय से आपका
मो॰ क॰ गांधी

अंग्रेजी की माइक्रोफिल्म से : लॉर्ड चेम्सफोर्ड पेपर्स। सौजन्य : नेहरू–स्मारक संग्रहालय तथा पुस्तकालय

  1. देखिए "सैनिक भर्ती की अपील", २२-६-१९१८।
  2. वाइसराय की कार्यकारिणी परिषद के (गृह) सदस्य सर विलियम हेनरी होर विंसेण्ट
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