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सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय
रामानन्द और रामजीभाई आयेंगे।
तुम परेशान नहीं होना। तुम अपने को स्वतन्त्र समझो और जो चाहते हो वही करो, इसी से तुम प्रगति करोगे। यदि तुम कुछ जानते नहीं तो उससे डरना नहीं और अगर तुम कुछ सीखना चाहते हो तो उसके लिए उतनी मेहनत करने को तैयार रहो।
बापू के आशीर्वाद
[गुजराती से]
मोटाना मन, पृ॰ १६–१७
१७३. पत्र : अब्दुल कादिर बावजीर को
नडियाद
सोमवार, २९ जुलाई, [१९१८][१]
भाईश्री इमाम साहब,
भाई सोराबजी यानी सोराबजी शापुर जी बेरिस्टर होकर आ गये हैं। आपने काम की तलाश करने का विचार किया, यह बहुत ठीक किया। यह तो मेरे ध्यान में है कि आप कुछ पढ़ते हैं पर यह आपके और मेरे लिए काफी नहीं है। खतीब साहब को सलाम कहना। हाजी साहब और फातिमा को वन्देमातरम्।
मोहनदास गांधी के वन्देमातरम्
भाईश्री इमाम साहब अब्दुल कादिर बावजीर
खतीब साहब का घर
करेडीवाडी
बम्बई–२
खतीब साहब का घर
करेडीवाडी
बम्बई–२
गुजराती की फोटो–नकल (सी॰ डब्ल्यू॰ १०७८३) से। सौजन्य : गुलाम रसूल कुरैशी
- ↑ डाक की मोहर पर से केवल '३० जुलाई' ही पढ़ा जा सका। नडियाद प्रवास से सम्बन्धित गांधीजी के यात्रा–वृत्तान्त से लगता है कि यह पत्र १९१८ में लिखा गया था। ३० जुलाई, १९१८ से पहले सोमवार २९ जुलाई को था।
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