सुधारने के बजाय तुम अनुवाद ही दुबारा करो। ऐसा करने में तुम्हें समय भी ज्यादा नहीं लगेगा और अनुवाद भी ठीक होगा।
गुजराती की फोटो–नकल (एस॰ एन॰ १९९९१) से
१८४. बातचीत : चन्द्रशंकर पंड्या के साथ[१]
बम्बई
२ फरवरी, १९१९
कुछ मुट्ठीभर लोगों को समाज के एक बहुत बड़े वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का क्या अधिकार है? यदि अधिकांश हिन्दू विवाह के सम्बन्ध में कुछ प्रतिबन्धों को स्वीकार करते हैं तो प्रत्येक व्यक्ति का, यदि वह अपने आपको हिन्दू समाज का अंग मानता है, कर्त्तव्य है कि वह बहुमत की इच्छाओं का आदर करे।
[गुजराती से]
समालोचक, फरवरी, १९१९
१८५. पत्र : अनसूयाबहिन साराभाई को
बम्बई
बसन्त पंचमी [५ फरवरी, १९१९][२]
महादेवभाई कल देहाण चले गये, इसलिए यह पत्र मैं अपने भांजे मथुरादास से लिखवा रहा हूं। डा॰ दलाल से बात हो जाने के बाद मैंने रविवार को [गुजरात] मेल से आश्रम जाने का निश्चय किया है। यदि ईश्वर ने चाहा तो मैं वहां सोमवार सुबह पहुंच जाऊंगा। मुझे दो मोटरों या गाड़ियों की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि हरिलाल के बच्चे भी मेरे साथ होंगे। महादेवभाई दुर्गाबहिन के साथ बुधवार को आश्रम पहुंचेंगे। ४० रुपयों की सात सेर दूध देने वाली बकरी या बकरियों की, या फिर उतने ही सेर दूध की जरूरत होगी। मैंने इस विषय में मगनलाल को भी लिखा दिया है। यहां फिर से मिल मजदूरों की हड़ताल की बात चल रही है, लेकिन मेरे विचार से अभी तो हमारा क्षेत्र अहमदाबाद ही है। यदि हम उसे ठीक प्रकार से निपटा सके तो दूसरी जगहों पर सहज ही इसके अच्छे परिणाम होंगे। मैं एक पल के लिए भी भूल नहीं पाता हूं कि उस पवित्र पेड़ की